इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र और शहर की समग्र जल एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से आज रेसीडेंसी में एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने की। बैठक में जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और शहर की वर्तमान स्थिति का विस्तृत विश्लेषण किया। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय नीरज मंडलोई, इंदौर जिले के प्रभारी अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित विधायकगण और अन्य जनप्रतिनिधि तथा विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
स्वास्थ्य निगरानी और अभियान
बैठक में मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में स्वास्थ्य की स्थिति अब तेजी से सामान्य हो रही है और कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया है। बावजूद इसके, एहतियातन क्षेत्र के प्रत्येक परिवार का स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत लगभग 50–60 हजार नागरिकों की जांच की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा घर-घर जाकर स्वास्थ्य की निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी संभावित समस्या का तुरंत उपचार किया जा सके। प्रभावित नागरिकों को स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किया जाएगा, जिसमें जांच, उपचार और फॉलो-अप की पूरी जानकारी दर्ज रहेगी।
जल आपूर्ति सुधार की ठोस कार्ययोजना
बैठक में जल आपूर्ति की स्थिति पर भी चर्चा की गई। भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइपलाइन कार्य तेजी से जारी है और लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र में पाइपलाइन डालने का कार्य पूरा हो चुका है। साथ ही, पानी के सैंपल लेकर उसकी नियमित जांच की जा रही है। तीन दिन के भीतर नर्मदा का शुद्ध जल पूरे क्षेत्र में उपलब्ध कराने की योजना है। इस क्षेत्र में 114 सरकारी और 80 से अधिक निजी ट्यूबवेल हैं। जल परीक्षण में यदि किसी ट्यूबवेल का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया तो उसमें क्लोरीनेशन किया गया। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि ट्यूबवेल का पानी पीने के लिए न लें, केवल घरेलू कार्यों में उपयोग करें।
नर्मदा जल आपूर्ति और टैंकर प्रणाली
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि भागीरथपुरा के 30 प्रतिशत क्षेत्र में जल्द ही नर्मदा जल सीधे पाइपलाइन के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। शेष 70 प्रतिशत क्षेत्र में शुद्ध जल टैंकरों के जरिए वितरित किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि टैंकर का पानी शुद्ध है, लेकिन नागरिकों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है।
शहरभर में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी
बैठक में यह भी तय किया गया कि पूरे शहर में पेयजल की गुणवत्ता पर सतत और ऑनलाइन निगरानी लागू की जाएगी। नगर निगम की सभी 105 जल टंकियों में विशेष जांच व्यवस्था होगी। प्रतिदिन विभिन्न स्थानों से पानी के नमूने लिए जाएंगे और उनकी जांच की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की जल प्रदूषण की संभावना समाप्त हो। इसके लिए एक विशेष सेल का गठन किया जाएगा, जो जल परीक्षण और निगरानी का कार्य करेगा।
नए बोरिंग पर रोक और नगर निगम में रिक्त पदों की पूर्ति
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अब शहर में नए बोरिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी, क्योंकि इससे पेयजल संबंधित समस्याएं अधिक हो रही हैं। इसके साथ ही नगर निगम में लंबे समय से रिक्त पदों को भरने के लिए डेपुटेशन और सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और इसके लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा।
अमृत योजना और सर्वोच्च प्राथमिकता: शुद्ध जल
बैठक में अमृत योजना के अंतर्गत लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने और तेजी से लागू करने के निर्देश दिए गए। मंत्री विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि शहर के प्रत्येक नागरिक तक शुद्ध और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज से “स्वच्छ जल अभियान” शुरू किया है, जो शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में समान रूप से लागू होगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जल आपूर्ति प्रणाली में लीकेज, दूषित जल की पहचान और समय पर सुधार करना है, ताकि जल-जनित बीमारियों से बचाव सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्यमंत्री की लगातार समीक्षा
अपर मुख्य सचिव मंडलोई ने बताया कि मुख्यमंत्री लगातार भागीरथपुरा क्षेत्र की स्थिति की समीक्षा और मॉनीटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर में विकास कार्यों और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक संसाधन और मदद मुहैया कराई जाएगी। किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी और नागरिकों को सुरक्षित जल उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।