भोपाल: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियां शुरू कर दी हैं। राज्य सरकार ने मेले के आयोजन और स्थायी विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार से 20,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का प्रस्ताव भेजा है। यह राशि 2016 में हुए पिछले सिंहस्थ के बजट (लगभग 5,000 करोड़ रुपये) से चार गुना अधिक है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा समेत कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद थे। सरकार का लक्ष्य इस बार के आयोजन को अब तक का सबसे भव्य और सुविधायुक्त बनाना है, क्योंकि इस बार 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जो 2016 की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है।
क्यों मांगी गई 20 हजार करोड़ की राशि?
सरकार ने इस भारी-भरकम बजट की जरूरत के पीछे स्थायी बुनियादी ढांचे के निर्माण का हवाला दिया है। पिछली बार की तरह अस्थायी निर्माण की जगह इस बार स्थायी विकास पर जोर दिया जा रहा है। इस राशि का एक बड़ा हिस्सा उज्जैन के कायाकल्प पर खर्च होगा।
योजना के तहत प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:
- नया इनर रिंग रोड: उज्जैन शहर में यातायात के दबाव को कम करने के लिए 70 किलोमीटर लंबा एक नया इनर रिंग रोड बनाया जाएगा।
- मेला क्षेत्र का विस्तार: श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मेला क्षेत्र को 3,500 हेक्टेयर से बढ़ाकर 7,500 हेक्टेयर किया जाएगा।
- सैटेलाइट टाउन: शहर के आसपास नए सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे ताकि श्रद्धालुओं के रुकने और अन्य सुविधाओं का प्रबंधन बेहतर हो सके।
- स्थायी निर्माण: सड़क, पुल, बिजली, पानी और सीवेज जैसी सभी व्यवस्थाएं स्थायी होंगी।
15 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए होंगी खास व्यवस्थाएं
पिछली बार 2016 के सिंहस्थ में करीब 7 करोड़ श्रद्धालु आए थे, लेकिन 2028 में यह आंकड़ा 15 करोड़ को पार कर सकता है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लिए सरकार विशेष इंतजाम कर रही है। क्षिप्रा नदी पर नए स्नान घाटों का निर्माण किया जाएगा ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और लोगों को स्नान के लिए सुरक्षित जगह मिल सके। इसके अलावा, आवास, परिवहन और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी विश्व स्तरीय बनाने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने दिए गुणवत्ता और समय-सीमा के निर्देश
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता वाले और स्थायी होने चाहिए। उन्होंने कहा, “सिंहस्थ के सभी काम समय-सीमा में पूरे किए जाएं। श्रद्धालुओं की सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से एक विस्तृत कार्ययोजना बनाकर केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय स्थापित करने को भी कहा है। कार्यों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे और काम समय पर पूरा हो सके।