भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का जंबूरी मैदान एक ऐसे ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना, जहां से प्रदेश की कृषि के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। यहां भविष्य की खेती का एक स्पष्ट खाका पेश किया गया, जिसका लक्ष्य पारंपरिक कृषि को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़कर किसानों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलना है। यह पहल प्रदेश की कृषि-अर्थव्यवस्था को एक नए सांचे में ढालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस नई कृषि दृष्टि का मूल आधार किसान को विकास के केंद्र में रखना है। सरकार की योजना एक ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जो खेत से शुरू होकर सीधे बाजार तक पहुंचती हो। इसका उद्देश्य बिचौलियों की भूमिका को कम करना और किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य दिलाना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें।
उद्योग और तकनीक का संगम
इस नई नीति के तहत कृषि को पहली बार उद्योग का दर्जा देने की राह खोली गई है। इसका मतलब है कि खेती से जुड़े व्यवसायों को भी उद्योगों की तरह सुविधाएं और प्रोत्साहन मिलेगा। खेत में पैदा होने वाले उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही, परंपरा और तकनीक का एक अनूठा संगम देखने को मिलेगा, जहां पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक कृषि यंत्रों, ड्रोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर उत्पादकता को बढ़ाया जाएगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति
यह पहल सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। जब किसान उद्यमी बनेगा और खेती एक लाभप्रद व्यवसाय में बदलेगी, तो गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह परिवर्तन का संदेश गांव-गांव तक पहुंच रहा है, जिससे किसानों में एक नया आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति उम्मीद जगी है। इस योजना से ग्रामीण भारत की एक नई और प्रगतिशील तस्वीर उभरने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंच प्रदेश की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। यहां से उठी प्रगति की आहट यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि सम्मान और समृद्धि का प्रतीक बनेगी। यह किसानों के उद्यमी बनने की यात्रा की शुरुआत है, जो मध्य प्रदेश को कृषि क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करेगी।