इंदौर। शहर के भागीरथपुरा इलाके में सूदखोरों से परेशान होकर एक परिवार द्वारा किए गए आत्मदाह के प्रयास के मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। शुक्रवार को कांग्रेस ने इस घटना के विरोध में एक ‘न्याय मार्च’ का आयोजन किया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुरजीत सिंह चड्ढा और विधायक संजय शुक्ला के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता गांधी भवन से पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पुलिस की निष्क्रियता के कारण ही परिवार को यह खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कमिश्नर को एक ज्ञापन सौंपकर मामले के सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने और सूदखोरों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने की मांग की।
क्या है भागीरथपुरा आत्मदाह कांड?
यह पूरा मामला मंगलवार का है, जब भागीरथपुरा निवासी अनिल पवार ने अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय के सामने आत्मदाह का प्रयास किया था। परिवार का आरोप है कि वे कुछ सूदखोरों से लंबे समय से प्रताड़ित थे और पुलिस से शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी। इस घटना में अनिल पवार और उनकी एक बेटी गंभीर रूप से झुलस गए, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप
न्याय मार्च के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि शहर में सूदखोरों का आतंक बढ़ता जा रहा है और पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। विधायक संजय शुक्ला ने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार ने कई बार पुलिस को सूदखोरों के बारे में जानकारी दी थी, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा, “अगर पुलिस पहले ही शिकायत पर ध्यान देती तो आज यह परिवार अस्पताल में जिंदगी और मौत से नहीं जूझ रहा होता।”
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे और बड़ा आंदोलन करेंगे। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने सूदखोरी और पुलिस की कथित लापरवाही के खिलाफ नारे लगाए। पुलिस ने इस मामले में बंटी, रिंकू, भूरा और जगदीश नामक चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।