Bhopal News : मध्य प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और खेती की लागत कम करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘कृषक कल्याण वर्ष’ की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाने के लिए 16 सरकारी विभाग मिलकर काम करेंगे। रविवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित एक कार्यक्रम में सीएम ने इस अभियान की औपचारिक शुरुआत की।
सरकार की रणनीति किसानों को केवल ‘अन्नदाता’ तक सीमित न रखकर उन्हें उद्यमी, ऊर्जा दाता और निर्यातक के रूप में स्थापित करना है। इसी लक्ष्य के साथ “समृद्ध किसान–समृद्ध प्रदेश” की थीम पर यह अभियान चलाया जाएगा। सरकार ने पारंपरिक खेती को एक लाभकारी व्यवसाय में बदलने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है।
तीन बड़े कृषि अनुसंधान केंद्र बनेंगे
प्रदेश में कृषि विकास को नई दिशा देने के लिए तीन प्रमुख अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों का उद्देश्य फसल उत्पादकता, गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना होगा।
डिंडौरी: यहां श्रीअन्न (मिलेट्स) पर केंद्रित एक अनुसंधान केंद्र बनाया जाएगा।
ग्वालियर: सरसों की पैदावार और गुणवत्ता सुधारने के लिए एक विशेष रिसर्च सेंटर स्थापित होगा।
उज्जैन: चने के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जाएगी।
तकनीक और बाजार पर विशेष फोकस
उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ सरकार की प्राथमिकता मार्केटिंग, प्रोसेसिंग और वैल्यू-एडिशन पर भी है। खेती को जोखिम से बचाने के लिए मौसम आधारित तकनीक और बीमा योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेशभर में WINDS (वेदर इंफॉर्मेशन नेटवर्क डाटा सिस्टम) विकसित किया जाएगा, जिससे किसानों को मौसम का सटीक पूर्वानुमान और कृषि सलाह मिल सकेगी।
किसानों और अधिकारियों को वैश्विक नवाचारों से परिचित कराने के लिए विदेश अध्ययन भ्रमण योजना भी शुरू की जाएगी। सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए प्रेशराइज्ड वाटर माइक्रो इरीगेशन योजना लागू होगी।
जोखिम घटाने के लिए नई पहल
किसानों को फसल खराब होने के जोखिम से बचाने के लिए मौसम आधारित बीमा योजना का दायरा बढ़ाया जाएगा। अब इसमें उद्यानिकी फसलों को भी शामिल किया जाएगा। तिलहन किसानों को राहत देने के लिए सरसों पर भावांतर योजना लागू करने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा, जमीनी स्तर पर किसानों की मदद के लिए ‘कृषक मित्र–कृषक दीदी’ योजना को फिर से शुरू किया जाएगा।
विभागों में होंगी नई भर्तियां
योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कृषि विभाग में खाली पड़े पदों को भरा जाएगा। विभाग में द्वितीय और तृतीय श्रेणी के 1,348 रिक्त पदों पर भर्ती होगी, जबकि मंडी बोर्ड में 386 पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करने के लिए सभी संभागीय बीज परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन कर उन्हें NABL से मान्यता दिलाई जाएगी।
मंडियों का आधुनिकीकरण और निर्यात को बढ़ावा
कृषि विपणन को आधुनिक बनाने के लिए प्रदेश की चिन्हित कृषि उपज मंडियों और सब्जी मंडियों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के लिए कृषि उत्पाद निर्यात योजना लागू की जाएगी। मृदा स्वास्थ्य के लिए प्रदेश में 3 माइक्रो न्यूट्रीएंट लैब भी स्थापित की जाएंगी। वहीं, नरवाई प्रबंधन के लिए कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट लगाए जाएंगे।