इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को इस मामले में 23वीं मौत दर्ज की गई, जिससे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं और बढ़ गई है। मृतक की पहचान 64 वर्षीय भगवानदास पिता तुकाराम भरणे के रूप में हुई है, जो पिछले 10 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे।
बॉम्बे हॉस्पिटल के जनरल मैनेजर राहुल पाराशर ने बताया कि भगवानदास को जब अस्पताल लाया गया था, तब उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था। सीपीआर देने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन गैंग्रीन और मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
यह घटना दिखाती है कि दिसंबर के अंत में शुरू हुआ यह संकट अभी भी गंभीर बना हुआ है। भागीरथपुरा के निवासी अब भी खौफ में जी रहे हैं और पीने के लिए आरओ, बोतलबंद या उबले हुए पानी पर निर्भर हैं।
अस्पतालों में मरीजों की संख्या में उतार-चढ़ाव
शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या लगातार बदल रही है। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 427 लोगों को भर्ती किया गया, जिनमें से 385 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। फिलहाल 42 मरीजों का इलाज चल रहा है।
चिंता की बात यह है कि गंभीर मरीजों की संख्या बनी हुई है। 11 जनवरी तक आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जबकि 8 जनवरी को यह आंकड़ा 10 था। इसके अलावा, पिछले कई दिनों से 3 मरीज लगातार वेंटिलेटर पर हैं, जो उनकी नाजुक हालत को दर्शाता है।
एक मौत पर उठे सवाल
इससे पहले, 59 वर्षीय कमला बाई की मौत को लेकर भी विवाद हुआ था। 9 जनवरी को एमवाय अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन इसे दूषित पानी से हुई मौत के रूप में दर्ज नहीं किया गया। परिजनों का आरोप है कि नगर निगम की टीम ने आधार कार्ड पर पता जीवन की फेल का होने के कारण इसे भागीरथपुरा के मामले से नहीं जोड़ा, जबकि वे 20 दिन पहले ही भागीरथपुरा रहने आए थे।
सूत्रो के मुताबिक, एमवाय अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव का कहना है कि कमला बाई भागीरथपुरा यूनिट में भर्ती नहीं थीं और पिछले एक साल से किडनी की बीमारी से भी पीड़ित थीं। मामला मेडिको-लीगल नहीं होने के कारण उनका पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया।
स्वास्थ्य विभाग का सर्वे और कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय है। रविवार को जारी बुलेटिन के मुताबिक, 50 दलों ने भागीरथपुरा में सर्वे किया। इस दौरान 176 सदस्यों ने 924 घरों का दौरा कर लोगों को ओआरएस और जिंक की गोलियां बांटीं।
इसके अलावा, महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य जांच भी की गई। इलाके में बनाए गए ओपीडी में डायरिया के 13 नए मरीज सामने आए, जिनमें से एक को अस्पताल रेफर करना पड़ा।