इंदौर में दूषित पानी का कहर, 10 दिनों में 23 लोगों की मौत, 100 से ज्यादा अस्पताल में भर्ती, प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

इंदौर: स्वच्छता के लिए देश भर में मशहूर इंदौर शहर इन दिनों एक गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। शहर के कई इलाकों में दूषित पानी की आपूर्ति के कारण पिछले 10 दिनों में कम से कम 23 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 100 से ज़्यादा लोग डायरिया और उल्टी जैसी बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती हैं। इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और स्थानीय निवासियों में डर का माहौल है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें हरकत में आ गई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं और स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों का इलाज किया जा रहा है। हालांकि, लगातार हो रही मौतों ने स्थिति को चिंताजनक बना दिया है।

कई इलाकों में फैला संक्रमण, मातम का माहौल

संक्रमण का सबसे ज़्यादा असर शहर के द्रविड़ नगर, आज़ाद नगर, जूना रिसाला और चंदन नगर जैसे इलाकों में देखने को मिल रहा है। द्रविड़ नगर में 14 साल की एक किशोरी पलक की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। बताया जा रहा है कि उसका भाई भी बीमार है। इसी तरह आज़ाद नगर में भी दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

प्रभावित कॉलोनियों में लगभग हर दूसरे घर में कोई न कोई सदस्य बीमार है। लोगों ने बताया कि नलों से गंदा और बदबूदार पानी आ रहा था, जिसे पीने के बाद लोगों को उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा, जहाँ कई लोगों ने दम तोड़ दिया।

प्रशासन की नींद टूटी, जांच के आदेश

मामला तूल पकड़ने के बाद इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव और कलेक्टर आशीष सिंह ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। महापौर ने स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि यह एक गंभीर मामला है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

महापौर भार्गव ने पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह टीम पाइपलाइनों की जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि पीने के पानी में सीवेज का पानी कैसे मिला। उन्होंने कहा, “यह लापरवाही अक्षम्य है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।” इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी टीमें तैनात कर दी हैं जो घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं और बीमार लोगों को दवाइयां मुहैया करा रही हैं।

पुरानी पाइपलाइन बनी मौत की वजह?

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम की लापरवाही के कारण यह संकट पैदा हुआ है। उनका कहना है कि कई इलाकों में नर्मदा की पेयजल लाइन और ड्रेनेज लाइन एक-दूसरे के पास से गुजरती हैं। पाइपलाइन दशकों पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं, जिनमें अक्सर लीकेज होती रहती है।

लोगों का आरोप है कि लीकेज के कारण ही सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया, जिससे यह जानलेवा संक्रमण फैला। उन्होंने कई बार इसकी शिकायत की, लेकिन अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। अब जब स्थिति हाथ से निकल गई है, तो प्रशासन जागा है। यह घटना इंदौर के स्वच्छता मॉडल पर एक गंभीर दाग लगाती है, जहाँ बुनियादी सुविधा यानी साफ पानी की कमी से लोगों की जान जा रही है।