इंदौर: शहर की सड़कों पर 10 जनवरी की सुबह एक तेज रफ्तार कार ने न केवल तीन युवा जिंदगियों को खत्म कर दिया, बल्कि समाज के सामने कई असहज सवाल भी खड़े कर दिए। रालामंडल के पास हुए इस भीषण हादसे में एक पूर्व गृहमंत्री की बेटी और एक कांग्रेस प्रवक्ता के बेटे समेत तीन युवाओं की दर्दनाक मौत हो गई। शुरुआती जांच में गाड़ी की रफ्तार 100 किमी/घंटा से अधिक बताई गई और वाहन से शराब की बोतलें भी मिलीं, जिसने इस बहस को और तेज कर दिया है।
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि इंदौर में तेजी से फैल रही उस ‘लेट नाइट पार्टी कल्चर’ का भयावह चेहरा है, जिस पर लंबे समय से चिंता जताई जा रही थी। इस घटना ने युवाओं की बदलती जीवनशैली, नशे के बढ़ते चलन और अभिभावकों की भूमिका पर एक बार फिर से ध्यान केंद्रित किया है।
हादसा, जो एक चेतावनी है
यह दुखद घटना उस समय हुई जब सूरज की पहली किरणें शहर पर पड़ रही थीं। तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें सवार तीनों युवाओं की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे ने उन तमाम चेतावनियों को सच साबित कर दिया है, जो विशेषज्ञ ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ के खिलाफ देते आ रहे हैं। नशे में चूर होकर सड़कों पर तेज रफ्तार से गाड़ी चलाना आज युवाओं के लिए एक खतरनाक ट्रेंड बन चुका है।
बदलती जीवनशैली और नशे का बढ़ता चलन
मीडिया रिपोर्ट्स और हालिया घटनाएं बताती हैं कि इंदौर के युवाओं में शराब पीना अब केवल एक आदत नहीं, बल्कि ‘स्टेटस सिंबल’ का रूप ले चुका है। देर रात 2-3 बजे तक चलने वाली पार्टियां आम हो गई हैं, जहाँ लड़के-लड़कियां बिना किसी रोक-टोक के शामिल होते हैं। पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण ने पारंपरिक सामाजिक मर्यादाओं को कमजोर किया है, जिससे हिंसक और आपराधिक घटनाओं का खतरा भी बढ़ा है।
अभिभावकों और समाज की जिम्मेदारी पर सवाल
इस पूरी बहस के केंद्र में माता-पिता और समाज की भूमिका है। आज ‘आजादी’ के नाम पर दी जा रही छूट कहीं बच्चों के भविष्य के लिए खतरा तो नहीं बन रही? कई अभिभावक इस बात से अनजान रहते हैं कि उनके बच्चे देर रात तक कहाँ और किन लोगों के साथ रहते हैं। जब घरों में होने वाले उत्सवों में शराब को सामान्य समझा जाता है, तो युवा पीढ़ी के लिए इसे गलत मानना मुश्किल हो जाता है।
अब आगे क्या? एक ठोस समाधान की जरूरत
इस घटना के बाद शहर में ठोस कदम उठाने की मांग तेज हो गई है। लोगों का मानना है कि पुलिस और प्रशासन को रात 11:30 बजे के बाद होने वाली अवांछित गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए। ‘ड्रंक एंड ड्राइव’ के मामलों में केवल जुर्माना नहीं, बल्कि जेल की सजा जैसे कड़े प्रावधान अनिवार्य किए जाने चाहिए। इसके अलावा, अभिभावकों को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने और स्कूलों में नैतिक शिक्षा को फिर से पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की जरूरत है, ताकि युवा पीढ़ी ‘आजादी’ और ‘अनुशासनहीनता’ के बीच का फर्क समझ सके।