Breaking News : इंदौर के बीआरटीएस कॉरिडोर मामले में एक नया मोड़ आ गया है, जिससे पूरी परियोजना पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। नगर निगम द्वारा नियुक्त एक कबाड़ी ठेकेदार ने कथित तौर पर लगभग 10 लाख रुपये की रेलिंग बेच दी, जिसके बाद निगम को सख्त कदम उठाने पड़े।
नगर निगम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बची हुई रेलिंग, बीम और अन्य सामान को जब्त कर लिया है। इस जब्त किए गए सामान को फिलहाल ट्रेचिंग ग्राउंड और आजाद नगर जीटीएस में सुरक्षित रखवाया गया है। इस घटनाक्रम के कारण कॉरिडोर को तोड़ने का काम पूरी तरह से रोक दिया गया है।
हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने भी इसमें हस्तक्षेप किया है। न्यायालय ने संबंधित कबाड़ी ठेकेदार को तलब किया है। इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को भी बुलाया गया है, जिन्हें इस कॉरिडोर पर एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण करना है।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर की कोई ठोस योजना अब तक तैयार नहीं है। इसकी ड्राइंग, डिजाइन और यह कहां से कहां तक बनेगा, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है, जिससे पूरा मामला और भी जटिल हो गया है।
ठेकेदार ने काम से हाथ खींचे
इस बीच, कबाड़ी ठेकेदार ने खुद को इस मामले में ठगा हुआ बताया है। उसने नगर निगम को लिखित में सूचित किया है कि वह यह काम आगे नहीं कर सकता। ठेकेदार के पीछे हटने से निगम की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
एलिवेटेड कॉरिडोर की अनिश्चितता के कारण डिवाइडर का काम भी शुरू नहीं हो पा रहा है। कुल मिलाकर, बीआरटीएस कॉरिडोर का मुद्दा नगर निगम के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है और तोड़फोड़ का काम अनिश्चित काल के लिए ठप हो गया है।