मकर संक्रांति 2026: 14 जनवरी को षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग, जानें खिचड़ी दान के नियम और सही तारीख

नई दिल्ली: साल 2026 में मकर संक्रांति के त्योहार को लेकर एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जिसने श्रद्धालुओं के बीच कुछ भ्रम पैदा कर दिया है। पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी 2026 को ही मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का व्रत एक साथ पड़ रहे हैं। यह एक बहुत ही कम देखने वाला संयोग है, जो लगभग 23 साल बाद हो रहा है।

इस स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान और सेवन कैसे किया जाए, क्योंकि एकादशी के दिन चावल का सेवन और दान वर्जित माना जाता है। ऐसे में दोनों पर्वों का पुण्य एक साथ कैसे प्राप्त करें, यह जानना महत्वपूर्ण है।

क्यों है खिचड़ी दान को लेकर भ्रम?

मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन स्नान, ध्यान और दान का विशेष महत्व है, खासकर चावल और उड़द की दाल से बनी खिचड़ी का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। वहीं, षटतिला एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन व्रत रखकर चावल से बनी किसी भी चीज का सेवन या दान नहीं किया जाता। दोनों परंपराएं एक ही दिन पड़ने के कारण भक्त दुविधा में हैं।

ज्योतिष विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?

ज्योतिष और धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, इस भ्रम का समाधान पंचांग में ही मौजूद है। 14 जनवरी 2026 को एकादशी तिथि शाम 5 बजकर 52 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इसका अर्थ है कि श्रद्धालु इस समय के बाद खिचड़ी का सेवन और दान कर सकते हैं। ऐसा करने से एकादशी के नियमों का उल्लंघन नहीं होगा और मकर संक्रांति की परंपरा भी निभाई जा सकेगी।

इसके अलावा एक और सरल उपाय सुझाया गया है। यदि कोई व्यक्ति पूरे दिन नियमों का पालन करना चाहता है, तो वह 14 जनवरी को तिल, गुड़ और गर्म कपड़ों जैसी वस्तुओं का दान कर सकता है। खिचड़ी का दान अगले दिन, यानी 15 जनवरी को द्वादशी तिथि पर भी किया जा सकता है, जो शास्त्रों के अनुसार शुभ है।

संक्रांति का पुण्य काल

साल 2026 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को दोपहर में होगा। इसलिए मकर संक्रांति का पुण्य काल दोपहर 03:13 बजे से शाम 06:15 बजे तक रहेगा। इस दौरान किया गया स्नान और दान अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दुर्लभ संयोग में भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे दोनों त्योहारों की मान्यताओं का सम्मान करते हुए अपनी सुविधानुसार दान-पुण्य करें।