कहावत है—सब्र का फल मीठा होता है। लेकिन मध्य प्रदेश के शिक्षकों के लिए यह फल केवल मीठा नहीं, बल्कि वर्षों की तपस्या के बाद मिली आर्थिक गरिमा से लबालब है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट का यह निर्णय किसी एक आदेश भर नहीं, बल्कि उन गुरुजनों के धैर्य और समर्पण को मिला सार्वजनिक सम्मान है, जिन्होंने तीन दशकों से भी अधिक समय तक कक्षा, किताब और बच्चों के भविष्य को अपना जीवन बना लिया। 35 वर्षों की सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों को अब ‘चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान’ का लाभ मिलेगा—एक ऐसा फैसला, जिसने सवा लाख से अधिक शिक्षकों के चेहरों पर खोई हुई मुस्कान लौटा दी है।
सरकारी भाषा नहीं, सीधी-सरल सच्चाई
अक्सर सरकारी फैसले जटिल शब्दों में उलझ जाते हैं, लेकिन इस निर्णय की आत्मा बेहद साफ है—लंबे समय तक ईमानदारी से सेवा करने वालों को बेहतर वेतन और सम्मान। इस योजना का लाभ दो प्रमुख संवर्गों को मिलेगा—LDT और UDT। यही वे शिक्षक हैं, जो वर्षों से स्कूलों की रीढ़ बने हुए हैं और जिनकी मेहनत से प्रदेश की पीढ़ियाँ आगे बढ़ीं।
LDT और UDT—कौन हैं ये शिक्षक?
LDT यानी लोअर डिवीजन टीचर, जिन्हें आम भाषा में सहायक शिक्षक कहा जाता है। प्रदेश में इनकी संख्या लगभग 70 हजार है। दूसरी ओर UDT यानी अपर डिवीजन टीचर, जिन्हें उच्च श्रेणी या माध्यमिक शिक्षक के रूप में जाना जाता है—इनकी संख्या करीब 52 हजार है। अब इन दोनों ही वर्गों के लिए वेतन का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है, जो उनकी सेवा अवधि को आर्थिक मजबूती में बदलेगा।
वेतन में बड़ा उछाल, जीवन में नई राहत
इस फैसले का सबसे बड़ा असर सीधे जेब पर पड़ेगा। ग्रेड पे में बदलाव के साथ हाथ में आने वाली सैलरी भी नई ऊंचाइयों को छुएगी। अनुमान है कि UDT शिक्षकों का औसत मासिक वेतन 1.25 लाख रुपये से ऊपर पहुंच सकता है, जबकि LDT शिक्षक भी करीब 1.15 लाख रुपये तक सैलरी पा सकेंगे। यह बढ़ोतरी केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि बेहतर जीवन, सुरक्षित भविष्य और आत्मसम्मान की कहानी है।
एरियर की सौगात—बीते समय का भी हिसाब
सरकार ने सिर्फ आगे की राह नहीं देखी, बल्कि पीछे मुड़कर भी न्याय किया है। इस वेतनमान की पात्रता 1 जुलाई 2023 से लागू मानी गई है। यानी जिन शिक्षकों ने इस तारीख से पहले 35 साल की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें ढाई साल का एरियर एकमुश्त मिलेगा। यह राशि 1.20 लाख से 1.80 लाख रुपये तक हो सकती है—एक ऐसी मदद, जो कई अधूरे सपनों को पूरा कर सकती है।
कब बदलेगा बैंक बैलेंस?
अब विभागीय स्तर पर हर शिक्षक की सेवा अवधि की बारीकी से जांच होगी। इस प्रक्रिया में लगभग दो महीने लग सकते हैं। उम्मीद है कि अप्रैल 2026 से शिक्षकों के खातों में बढ़ी हुई सैलरी आना शुरू हो जाएगी। यानी नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत उनके लिए नई उम्मीदों के साथ होगी।
रिटायर्ड शिक्षकों की नजरें भी टिकीं
जो शिक्षक अपनी सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उनके मन में भी उम्मीद की किरण जगी है। फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि उन्हें पेंशन में आनुपातिक बढ़ोतरी का लाभ मिल सकता है। यदि ऐसा हुआ, तो यह फैसला उनकी ढलती उम्र को आर्थिक सुरक्षा और सम्मान—दोनों देगा।
सिर्फ आंकड़ा नहीं, एक एहसास
कुल 322 करोड़ 34 लाख रुपये की यह स्वीकृति किसी बजट हेड की एंट्री भर नहीं है। यह उन हाथों के प्रति कृतज्ञता है, जिन्होंने अक्षर ज्ञान से लेकर जीवन मूल्यों तक की नींव रखी। यह फैसला बताता है कि जब गुरु का सम्मान होता है, तब समाज का भविष्य और भी मजबूत होता है।