इंदौर: स्वच्छता में सात बार देश का सिरमौर रहा इंदौर इन दिनों विकास और पर्यावरण के बीच एक बड़े द्वंद्व का गवाह बन रहा है। शहर के ऐतिहासिक ‘रानी सराय’ क्षेत्र की हरियाली को मेट्रो स्टेशन की भेंट चढ़ने से बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों और जनहित पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है।
कड़कड़ाती ठंड के बावजूद, प्रदर्शनकारी पिछले दो हफ्तों से रानी सराय परिसर में ही ‘सत्याग्रह’ पर डटे हुए हैं।
विकास बनाम विनाश की जंग
मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत रानी सराय में एक अंडरग्राउंड स्टेशन प्रस्तावित है, जिसके निर्माण के लिए लगभग 225 से 250 पुराने पेड़ों को काटा जाना है। आंदोलनकारियों का तर्क है कि इंदौर, जो कभी अपनी ठंडी रातों और 30% हरियाली के लिए मशहूर था, अब मात्र 9% वन क्षेत्र पर सिमट गया है।
जनहित पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इन पेड़ों का विस्तृत ‘पंचनामा’ तैयार किया है, जिसमें पेड़ों की प्रजाति और उनकी आयु का उल्लेख है, ताकि प्रशासन को उनकी महत्ता बताई जा सके।
मैदान में ही चूल्हा और बिस्तरे
1 जनवरी से शुरू हुआ यह अनिश्चितकालीन धरना अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारी परिसर में ही भोजन पका रहे हैं और रात की हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भी पेड़ों के नीचे ही सो रहे हैं। उनका कहना है कि ये पेड़ न केवल ऑक्सीजन देते हैं, बल्कि हजारों पक्षियों का आशियाना भी हैं।
बिना अनुमति निर्माण का आरोप
आंदोलनकारियों ने स्थानीय प्रशासन और मेट्रो प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि निर्माण कंपनी को अभी तक नगर निगम से पेड़ काटने की औपचारिक अनुमति नहीं मिली है, फिर भी इलाके को शेड्स से घेरकर काम शुरू कर दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मेट्रो स्टेशन को कुछ मीटर दूर स्थानांतरित करने या डिजाइन में तकनीकी बदलाव करने का सुझाव दिया है।
शहर के ईको-सिस्टम पर खतरा
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रीगल चौराहा और रानी सराय क्षेत्र शहर के फेफड़े हैं। अगर इन्हें नष्ट किया गया, तो शहर का तापमान और बढ़ेगा। “विकास जरूरी है, लेकिन विनाश की कीमत पर नहीं” के नारे के साथ प्रदर्शनकारी अब आम जनता को भी इस मुहिम से जोड़ रहे हैं।
रीगल चौराहे पर पोस्टर और बैनर के जरिए लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन विकास की रफ्तार को चुनता है या इंदौर की ऐतिहासिक हरियाली को बचाने के लिए मेट्रो के नक्शे में बदलाव करता है।