लोकतंत्र और टेक्नोलॉजी पर PM मोदी का फोकस, CSPOC सम्मेलन का किया उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर के संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में कॉमनवेल्थ देशों के स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC 2026) का औपचारिक शुभारंभ किया। भागीदारी के लिहाज से यह सम्मेलन अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है। इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत ऐसे ओपन-सोर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है, जिससे ग्लोबल साउथ के देश भी भारत की तरह मजबूत डिजिटल सिस्टम तैयार कर सकें।

ग्लोबल साउथ को नई दिशा देने की पहल

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है और अब ग्लोबल साउथ के देशों के लिए नए रास्ते तलाशने का समय आ गया है। उन्होंने दोहराया कि भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती से उठाया है। G20 की अध्यक्षता के दौरान भी भारत ने इन देशों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी और उन्हें वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रखा।

ओपन-सोर्स इनोवेशन से साझेदार देशों को लाभ

पीएम मोदी ने बताया कि भारत में हो रहे तकनीकी नवाचारों का लाभ केवल देश तक सीमित न रहकर पूरे ग्लोबल साउथ और कॉमनवेल्थ देशों तक पहुंचे, यही भारत की सोच है। इसी उद्देश्य से ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का अहम लक्ष्य यह भी है कि अलग-अलग देशों के बीच संसदीय लोकतंत्र की समझ और अनुभव साझा कर उसे और मजबूत बनाया जा सके।

लोकतांत्रिक मूल्यों पर भारत की मजबूत नींव

प्रधानमंत्री ने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि विविधता को भारत ने अपनी लोकतांत्रिक शक्ति में बदला है। मजबूत संस्थाओं और प्रक्रियाओं की वजह से भारत स्थिरता, तेजी और बड़े पैमाने पर विकास कर पाया है। उन्होंने कहा कि भारत में बहस, संवाद और सामूहिक निर्णय लेने की परंपरा सदियों पुरानी है, जो लोकतंत्र को मजबूती देती है।

सम्मेलन का विषय और सेंट्रल हॉल का ऐतिहासिक महत्व

पीएम मोदी ने बताया कि CSPOC सम्मेलन का आयोजन भारत में चौथी बार हो रहा है और इस बार इसका विषय है ‘संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी डिलीवरी’। उन्होंने इसे मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के लिए बेहद प्रासंगिक बताया। साथ ही सेंट्रल हॉल के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यहीं संविधान सभा की बैठकें हुई थीं और देश के कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए थे।

42 देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी

इस सम्मेलन में 42 कॉमनवेल्थ देशों के 61 स्पीकर और पीठासीन अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। इसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कर रहे हैं। सम्मेलन के दौरान संसद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल, सोशल मीडिया के सांसदों पर प्रभाव, जनता की भागीदारी बढ़ाने के नए उपाय, तथा सांसदों की सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम विषयों पर चर्चा की जाएगी।

कौन-कौन से देश हैं शामिल?

सम्मेलन में कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। हालांकि पाकिस्तान और बांग्लादेश इस बार इसमें हिस्सा नहीं ले रहे हैं, क्योंकि वहां फिलहाल स्पीकर का पद रिक्त है।

भारत के लिए गर्व का अवसर

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि लगभग डेढ़ दशक बाद भारत को इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय संसदीय सम्मेलन की मेजबानी करने का अवसर मिला है, जो देश के लिए गर्व और सम्मान की बात है।