इंदौर में राहुल गांधी का दौरा कल : प्रशासन ने नहीं दी बड़ी मीटिंग की मंजूरी, अब सिर्फ बॉम्बे हॉस्पिटल और भागीरथपुरा जाएंगे

Indore News : मध्य प्रदेश की व्यापारिक राजधानी इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण मची चीख-पुकार के बीच, कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कल, 17 जनवरी को शहर के दौरे पर आ रहे हैं।

इस त्रासदी में अब तक 24 लोगों की मौत होने की खबर है, जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति में उबाल ला दिया है।

प्रशासन ने ठुकराई बैठक की अनुमति

राहुल गांधी के दौरे से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। जिला प्रशासन ने शहर के अभय प्रशाल और आनंद मोहन माथुर सभागार में प्रस्तावित कांग्रेस नेताओं और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बैठक को अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

इस बैठक में प्रदेशभर से करीब एक हजार पार्षदों, महापौरों और नगर पालिका अध्यक्षों के शामिल होने की योजना थी। कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले ने पुष्टि की है कि प्रशासन की मंजूरी न मिलने के कारण अब इस महत्वपूर्ण बैठक को रद्द कर दिया गया है।

दौरे का नया शेड्यूल: पीड़ितों के बीच जाएंगे राहुल

बैठक रद्द होने के बाद अब राहुल गांधी का कार्यक्रम पूरी तरह से त्रासदी के पीड़ितों पर केंद्रित रहेगा। तय कार्यक्रम के अनुसार:

  • बॉम्बे हॉस्पिटल: राहुल गांधी सबसे पहले यहां भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात कर उनका हाल जानेंगे।

  • भागीरथपुरा दौरा: इसके बाद वे सीधे उस प्रभावित क्षेत्र में जाएंगे जहां दूषित जल ने कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं। वे उन शोकाकुल परिवारों से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करेंगे।

17 से 31 जनवरी: कांग्रेस का प्रदेशव्यापी आंदोलन

राहुल गांधी के इस दौरे के साथ ही मध्य प्रदेश कांग्रेस एक बड़े आंदोलन का शंखनाद करने जा रही है।

  1. प्रथम चरण (17 जनवरी): पूरे प्रदेश के शहरी और ग्रामीण जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ता सुबह 11 से शाम 4 बजे तक एक दिवसीय उपवास रखेंगे। यह उपवास जल गुणवत्ता और मनरेगा के कानूनी अधिकारों की बहाली की मांग को लेकर होगा।

  2. द्वितीय चरण (18-31 जनवरी): 15 दिनों तक चलने वाले इस चरण में पार्टी जल स्रोतों और सीवेज लाइनों की जांच के लिए साक्ष्य जुटाएगी और जनजागरूकता अभियान चलाएगी।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्ष के इस दौरे पर हमला बोलते हुए इसे ‘लाशों पर राजनीति’ करार दिया है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि वे ‘स्वच्छता के मॉडल’ शहर में हुई इस बड़ी प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।