भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से एक और मौत होने से जुड़ी खबरों को स्वास्थ्य विभाग ने भ्रामक बताते हुए स्पष्ट रूप से खारिज किया है। 16 जनवरी को विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार “भागीरथपुरा में 24वीं मौत, 78 वर्षीय महिला ने इलाज के दौरान दम तोड़ा” के संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने वास्तविक स्थिति से अवगत कराया है।
उल्टी-दस्त नहीं, हृदय रोग था मृत्यु का कारण
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि 78 वर्षीय सुभद्राबाई पति वसंतराव पंवार की मृत्यु उल्टी-दस्त या डायरिया के कारण नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में फैलाई जा रही जानकारी तथ्यहीन है। डॉ. हासानी के अनुसार, मेट्रो अस्पताल प्रबंधन ने भी इसकी पुष्टि की है कि सुभद्राबाई का इलाज डायरिया के लिए नहीं किया जा रहा था।
परिवार ने भी स्पष्ट की वास्तविक स्थिति
मृतका के पुत्र डॉ. सतीश पंवार, जो स्वयं एनेस्थीसिया विशेषज्ञ हैं, ने समाचार पढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग को सही जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनकी माता को पहले से हृदय रोग की समस्या थी और उन्हें सीने में दर्द की शिकायत के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हुई, जिसका दूषित पानी या डायरिया से कोई संबंध नहीं है।
दूषित पानी के मामलों से न जोड़ने की अपील
डॉ. सतीश पंवार ने स्वास्थ्य विभाग से निवेदन किया कि उनकी माता की मृत्यु को दूषित पानी पीने से जोड़कर न देखा जाए, क्योंकि यह न केवल असत्य है बल्कि शोकाकुल परिवार के लिए अत्यंत आपत्तिजनक भी है। स्वास्थ्य विभाग ने इस मांग को स्वीकार करते हुए समाचार का आधिकारिक रूप से खंडन किया है।
स्वास्थ्य विभाग की लोगों से अपील
स्वास्थ्य विभाग ने आमजन और मीडिया से अपील की है कि बिना पुष्टि के इस तरह की संवेदनशील खबरें प्रकाशित न की जाएं। विभाग ने स्पष्ट किया कि गलत जानकारी से लोगों में अनावश्यक भय फैलता है और प्रभावित परिवारों को मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती है।