Mumbai News: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा वैचारिक और चुनावी उलटफेर देखने को मिला है। हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम चुनावों के परिणामों ने यह साफ कर दिया है कि राज्य में अब केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ही एकमात्र ‘सर्वव्यापी’ शक्ति बनकर उभरी है। राज्य के 29 में से 25 नगर निगमों पर कब्जा जमाकर BJP ने न केवल विपक्ष, बल्कि अपने सहयोगियों को भी कड़ा संदेश दिया है।
चाणक्य नीति: 6 साल की योजना का परिणाम
यह जीत कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि 2019 में उद्धव ठाकरे द्वारा गठबंधन तोड़ने के बाद बुनी गई एक लंबी रणनीति का हिस्सा है। BJP सूत्रों के अनुसार, पार्टी का लक्ष्य स्पष्ट था—विपक्ष को कमजोर करना और खुद को आत्मनिर्भर बनाना। रणनीति के तहत पहले एकनाथ शिंदे के जरिए शिवसेना को दोफाड़ किया गया और फिर अजित पवार के माध्यम से शरद पवार की NCP की ताकत को कम किया गया।
क्षेत्रीय क्षत्रप अपने गढ़ों में सिमटे
चुनाव नतीजों ने मराठा राजनीति के बड़े चेहरों की सीमाओं को उजागर कर दिया है:
उद्धव और राज ठाकरे: मराठी मानुस की राजनीति करने वाले ये दोनों नेता अब केवल मुंबई तक सीमित नजर आ रहे हैं।
एकनाथ शिंदे: मुख्यमंत्री होने के बावजूद शिंदे का प्रभाव मुख्य रूप से ठाणे तक ही सिमट कर रह गया है।
अजित पवार: चाचा शरद पवार के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाले अजित पवार इस चुनाव के सबसे बड़े ‘लूजर’ बनकर उभरे हैं।
कांग्रेस: पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जहाँ वह लातूर और चंद्रपुर को छोड़कर बाकी हर जगह पिछड़ गई।
BJP का ‘क्लीन स्वीप’
मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक, नवी मुंबई और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे बड़े आर्थिक केंद्रों पर अब BJP का परचम है। विदर्भ से लेकर पश्चिमी महाराष्ट्र और कोंकण तक, BJP ने उन किलों को भी ध्वस्त कर दिया है जिन्हें कभी शिवसेना या NCP का अभेद्य गढ़ माना जाता था।
नतीजों के मायने: अब सहयोगियों की मजबूरी नहीं?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन नतीजों से यह स्पष्ट है कि शिवसेना और NCP में टूट के बाद जो वोट बैंक बिखरा था, उसका बड़ा हिस्सा अब BJP की ओर शिफ्ट हो गया है। आज BJP उस स्थिति में पहुँच गई है जहाँ उसे भविष्य में सत्ता के लिए किसी बैसाखी की जरूरत शायद न पड़े।
यह चुनाव परिणाम महाराष्ट्र की राजनीति के उस दौर का अंत है जहाँ क्षेत्रीय पार्टियां किंगमेकर हुआ करती थीं। अब महाराष्ट्र में ‘एकल पार्टी’ वर्चस्व का दौर शुरू होता दिख रहा है।