गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है, जो भगवान विष्णु और गरुड़ के संवाद के रूप में रचित है। हिंदू परंपरा में मृत्यु के पश्चात गरुड़ पुराण का पाठ अनिवार्य माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसके श्रवण और पाठ से आत्मा को शांति, सद्गति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस पुराण में जीवन, मृत्यु, पाप-पुण्य, कर्म और धर्म से जुड़े नियमों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
गरुड़ पुराण में भोजन को लेकर चेतावनी
गरुड़ पुराण केवल मृत्यु से जुड़े विषयों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को सही दिशा देने वाले नीति-नियम भी बताता है। इसमें यह भी उल्लेख है कि कुछ लोगों के घर पर भूलकर भी भोजन नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से व्यक्ति के कर्म प्रभावित होते हैं, पाप बढ़ते हैं और धन-स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
चोर या अपराधी के घर भोजन वर्जित
गरुड़ पुराण के अनुसार जो व्यक्ति चोरी या किसी गंभीर अपराध में संलिप्त हो, उसके घर भोजन करने से बचना चाहिए। ऐसे लोगों के यहां भोजन करने से व्यक्ति के पाप बढ़ते हैं और जीवन में अनेक प्रकार की बाधाएं आती हैं।
ईश्वर की निंदा करने वालों से दूरी
जो लोग भगवान की निंदा करते हैं या जिनका आचरण अधार्मिक होता है, उनके यहां भोजन करना भी शास्त्रों में निषिद्ध बताया गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार ऐसे लोगों के संपर्क में आने से समाज में अपयश मिलता है और मानसिक शांति भंग होती है।
रोगी और अनुचित ब्याज लेने वालों के घर भोजन न करें
गरुड़ पुराण में कहा गया है कि गंभीर रूप से रोगग्रस्त व्यक्ति के यहां भोजन करने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं जो लोग दूसरों की मजबूरी का लाभ उठाकर अनुचित ब्याज वसूलते हैं, उनके यहां भोजन करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि यह अधर्म की श्रेणी में आता है।
चुगलखोर व्यक्तियों के घर भोजन से बचें
दूसरों की चुगली करने वाले लोग समाज में विष घोलने का काम करते हैं। गरुड़ पुराण में ऐसे व्यक्तियों के यहां भोजन करने को पाप बताया गया है, क्योंकि वे दूसरों को कष्ट पहुंचाकर स्वयं आनंद लेते हैं।
नशीले पदार्थों का व्यापार करने वाले
जो लोग शराब या अन्य नशीले पदार्थों का व्यापार करते हैं, उनके घर भोजन करना भी गरुड़ पुराण में वर्जित माना गया है। नशे के कारण कई परिवार बर्बाद हो जाते हैं और ऐसे लोगों के यहां भोजन करने से जीवन में सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।