उज्जैन में लगातार दूसरे वर्ष आयोजित हुए व्यापार मेले का सीधा प्रभाव अब इंदौर के परिवहन विभाग के आंकड़ों में साफ नजर आने लगा है। मेले में वाहनों पर मिलने वाली आकर्षक छूट और सुविधाओं की वजह से इंदौर जिले में बिकने वाले कई वाहन उज्जैन में पंजीकृत कराए गए। इसका नतीजा यह हुआ कि प्रदेश का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार माने जाने वाले इंदौर में वर्ष 2025 के दौरान वाहन पंजीयन और उससे मिलने वाले राजस्व, दोनों में गिरावट दर्ज की गई।
वाहन बिक्री घटी, राजस्व में भारी कमी
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में इंदौर परिवहन कार्यालय में कुल 1 लाख 98 हजार 530 वाहनों का पंजीयन हुआ, जिससे करीब 805 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं इसके मुकाबले वर्ष 2024 में 1 लाख 99 हजार 82 वाहनों का पंजीयन हुआ था और उस दौरान विभाग को 883 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। इस तरह एक ही साल में 552 वाहन कम पंजीकृत हुए और राजस्व में लगभग 77 करोड़ रुपये की सीधी गिरावट दर्ज की गई।
प्रतिशत के हिसाब से भी दिखा नुकसान
आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025 में इंदौर में वाहन बिक्री में 0.30 प्रतिशत की कमी आई, जबकि राजस्व में गिरावट कहीं ज्यादा रही। राजस्व में 8.79 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जो परिवहन विभाग के लिए चिंता का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगे वाहनों का पंजीयन बाहर होने से राजस्व पर ज्यादा असर पड़ा, क्योंकि ऐसे वाहनों से मिलने वाला टैक्स और शुल्क अधिक होता है।
उज्जैन व्यापार मेला बना गिरावट की बड़ी वजह
परिवहन अधिकारियों के अनुसार, राजस्व में आई इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण उज्जैन में आयोजित व्यापार मेला माना जा रहा है। मेले के दौरान कई लग्जरी और महंगे वाहन, जिनकी कीमत 20 लाख रुपये से अधिक थी, उज्जैन में ही पंजीकृत कराए गए। इससे इंदौर, जो आमतौर पर ऐसे वाहनों का प्रमुख पंजीयन केंद्र रहता है, वहां का राजस्व प्रभावित हुआ। छूट और अन्य लाभों की वजह से खरीदारों ने पंजीयन के लिए उज्जैन को प्राथमिकता दी।
मेले से पहले लगातार बढ़ रहा था ग्राफ
यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उज्जैन व्यापार मेले के आयोजन से पहले इंदौर में वाहन बिक्री और राजस्व लगातार बढ़ रहा था। वर्ष 2023 में, 2022 की तुलना में वाहन बिक्री में 17.58 प्रतिशत और राजस्व में 23.88 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। यह इंदौर के ऑटोमोबाइल बाजार की मजबूती को दर्शाता है।
2024 से शुरू हुई सुस्ती, 2025 में और बढ़ी गिरावट
हालांकि वर्ष 2024 में उज्जैन में व्यापार मेले के आयोजन के बाद इंदौर की रफ्तार कुछ थमती नजर आई। 2023 की तुलना में 2024 में वाहन बिक्री में सिर्फ 4.92 प्रतिशत और राजस्व में 1.72 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी ही हो सकी। इसके बाद 2025 में स्थिति और बिगड़ गई, जब बिक्री और राजस्व दोनों में गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि उज्जैन व्यापार मेले का असर अब इंदौर के परिवहन राजस्व पर स्थायी रूप से दिखने लगा है।
इंदौर के लिए बन सकती है चुनौती
प्रदेश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल हब के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर के लिए यह स्थिति एक चुनौती के रूप में उभर रही है। यदि आने वाले वर्षों में भी व्यापार मेले के चलते पंजीयन का रुझान उज्जैन की ओर बना रहा, तो इंदौर परिवहन कार्यालय को अपने राजस्व लक्ष्य हासिल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में विभाग और प्रशासन के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि इस गिरावट को कैसे रोका जाए और इंदौर के ऑटोमोबाइल बाजार की मजबूती कैसे बनाए रखी जाए।