मध्यप्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। आने वाले 48 से 72 घंटों के भीतर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में ठंड का असर और तेज हो सकता है। भोपाल मौसम केंद्र के वैज्ञानिकों ने मौजूदा मौसमी परिस्थितियों का विश्लेषण करने के बाद ग्वालियर, चंबल और रीवा संभाग के लिए घने कोहरे का अलर्ट जारी किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सक्रिय हो रहे नए मौसमी सिस्टम के कारण रात और सुबह के समय ठिठुरन बढ़ेगी, जबकि दिन में भी ठंड से राहत मिलने के आसार कम हैं।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में ठंड बढ़ने की सबसे बड़ी वजह एक साथ सक्रिय हुए दो नए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस हैं। इन सिस्टम्स के चलते उत्तर भारत से ठंडी हवाएं मध्यप्रदेश की ओर बढ़ेंगी। इसका सीधा असर ग्वालियर, चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र में देखने को मिल सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि तापमान में गिरावट के साथ-साथ पाले की स्थिति भी बन सकती है, खासकर ग्वालियर और छतरपुर बेल्ट में फसलों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
भोपाल मौसम केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक दिव्या ई. सुरेंद्रन के मुताबिक, इस समय उत्तर और मध्य भारत के ऊपर एक साथ तीन साइक्लोनिक सिस्टम सक्रिय हैं। पाकिस्तान से लेकर राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक फैले ये सिस्टम मध्यप्रदेश के मौसम को सीधे प्रभावित कर रहे हैं। खासतौर पर मध्य राजस्थान के ऊपर बना साइक्लोन वातावरण से नमी खींच रहा है, जिसकी वजह से प्रदेश के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में ठंड का असर और तीखा महसूस किया जाएगा। 19 जनवरी 2026 के बाद एक नई ठंड की लहर के संकेत भी मिल रहे हैं।
मौसम के बदलते समीकरणों को समझें तो सबसे पहले राजस्थान से आ रहे प्रभाव पर नजर डालनी होगी। मध्य राजस्थान के ऊपर समुद्र तल से करीब 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर बना साइक्लोनिक सिस्टम इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर जैसे क्षेत्रों में नमी और बादल ला सकता है। इससे दिन के तापमान में गिरावट आएगी और सुबह-शाम की ठंड और ज्यादा बढ़ेगी।
इसके साथ ही बैक-टू-बैक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस भी प्रदेश की ठंड को और गंभीर बनाने वाले हैं। 19 जनवरी और फिर 21 जनवरी की रात से उत्तर-पश्चिम भारत में दो नए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस प्रवेश करेंगे। इनके प्रभाव से तेज ठंडी हवाएं चल सकती हैं और तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। खासकर उत्तर और उत्तर-पूर्वी मध्यप्रदेश में इसका असर ज्यादा रहेगा।
इन मौसमी परिस्थितियों का सबसे बड़ा असर ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र में देखने को मिलेगा। दतिया, भिंड, मुरैना और छतरपुर जिलों में सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। कई इलाकों में दृश्यता 500 मीटर से भी कम हो सकती है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित होने की आशंका है।
ठंड के लिहाज से भी स्थिति काफी गंभीर हो सकती है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण हिमालय से आने वाली बर्फीली हवाएं सीधे मैदानी इलाकों तक पहुंचेंगी। इसका असर यह होगा कि खजुराहो, नौगांव और रीवा जैसे क्षेत्रों में रात का तापमान 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। इससे लोगों को कड़ाके की सर्दी का सामना करना पड़ेगा।
वहीं, राजस्थान के एक्टिव साइक्लोन के कारण अगले 48 घंटों में भोपाल, नीमच, मंदसौर और रतलाम जैसे जिलों में बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। कुछ स्थानों पर बहुत हल्की बूंदाबांदी भी हो सकती है। इससे दिन के तापमान में और गिरावट आएगी और कई जिलों में कोल्ड डे जैसे हालात बन सकते हैं।
इसके अलावा ऊपरी वायुमंडल में सक्रिय पश्चिमी जेट स्ट्रीम भी मौसम को प्रभावित कर रही है। करीब 135 नॉट की रफ्तार से बह रही यह जेट स्ट्रीम वातावरण में नमी बनाए रखेगी, जिससे धूप कमजोर रहेगी। नतीजतन, दिन में भी ठंड का एहसास बना रहेगा और लोगों को अलाव व गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ेगा।
कुल मिलाकर, आने वाले कुछ दिन मध्यप्रदेश के लिए कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे वाले साबित हो सकते हैं। मौसम विभाग ने किसानों और आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, खासकर उन इलाकों में जहां पाले और कोहरे का खतरा अधिक बना हुआ है।