कर्नल सोफिया कुरैशी पर की थी विवादित टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट में विजय शाह केस की सुनवाई आज

New Delhi : मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर है।
करीब छह महीने के लंबे अंतराल के बाद, आज सुप्रीम कोर्ट इस हाई-प्रोफाइल मामले पर सुनवाई करेगा। यह मामला न केवल एक महिला सैन्य अधिकारी के सम्मान से जुड़ा है, बल्कि सार्वजनिक जीवन में राजनेताओं की भाषा की मर्यादा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला पिछले साल 11 मई 2025 का है, जब इंदौर के महू स्थित रायकुंडा गांव में आयोजित एक ‘हलमा सभा’ को संबोधित करते हुए मंत्री विजय शाह ने मर्यादा की सीमाएं लांघ दी थीं। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी को “आतंकवादियों की बहन” करार दिया था।
शाह ने अपने भाषण में बेहद तीखे और विवादास्पद शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा था कि “मोदी जी ने उनकी (आतंकवादियों की) समाज की बहन को उन्हें नंगा करने के लिए भेजा है।” उन्होंने आगे कहा था कि देश के मान-सम्मान और हिंदुओं के सुहाग का बदला लेने के लिए उनकी ही जाति की बहन को पाकिस्तान भेजा गया।
कानूनी कार्रवाई और कोर्ट की फटकार
इस बयान के वायरल होने के बाद भारी आक्रोश पैदा हुआ। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 14 मई को मानपुर थाने में विजय शाह के खिलाफ FIR दर्ज की गई। इसी FIR को चुनौती देने के लिए मंत्री विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
पिछली सुनवाइयों के दौरान कोर्ट का रुख काफी कड़ा रहा है:
  • माफी पर नाराजगी: जब विजय शाह के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने ऑनलाइन माफी मांग ली है, तो जस्टिस ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई।
  • कोर्ट की टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आप एक पब्लिक फिगर हैं। बोलते समय आपको अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। आप जनता के सामने बेनकाब हो चुके हैं।”
आज की सुनवाई क्यों है अहम?
जुलाई में हुई पिछली सुनवाई के बाद आज छह महीने बाद यह केस दोबारा लिस्ट हुआ है। कोर्ट आज यह तय कर सकता है कि क्या मंत्री के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द किया जाना चाहिए या उनके खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा।

नोट: कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की एक सम्मानित अधिकारी हैं और एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए किसी राजनेता द्वारा उनके धर्म या समाज को लेकर ऐसी टिप्पणी करना कानूनी रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।