MP उच्च शिक्षा विभाग: तबादला नीति से हजारों प्राध्यापकों को राहत, स्वैच्छिक और प्रशासनिक स्थानांतरण के नियम जारी

मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने अपने हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। विभाग ने लंबे समय से प्रतीक्षित तबादला नीति जारी कर दी है। इस फैसले के बाद प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में पदस्थ प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, क्रीड़ा अधिकारी और ग्रंथपाल अब अपनी मनचाही जगह पर स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखने के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, यह तबादला नीति सीमित समय के लिए प्रभावी रहेगी। इसमें प्रशासनिक आवश्यकताओं और मानवीय दृष्टिकोण दोनों का ध्यान रखा गया है। जो कर्मचारी लंबे समय से अपने गृह जिले से दूर पदस्थ थे, उनके लिए यह एक सुनहरा अवसर है। हालांकि, विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि स्थानांतरण से शैक्षणिक कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।

केवल ऑनलाइन आवेदन मान्य

विभाग ने पुरानी फाइलों और कागजी कार्रवाई को खत्म करते हुए प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया है। इच्छुक आवेदकों को विभागीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। ऑफलाइन या डाक से भेजे गए किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों का ही परीक्षण करें और अपनी अनुशंसा भेजें।

स्वैच्छिक और प्रशासनिक आधार

नई नीति के तहत तबादले मुख्य रूप से दो श्रेणियों में किए जाएंगे: स्वैच्छिक और प्रशासनिक। स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए रिक्त पदों की उपलब्धता अनिवार्य होगी। वहीं, गंभीर बीमारी, दिव्यांगता या पति-पत्नी के एक ही स्थान पर पदस्थापना जैसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा, जिन प्राध्यापकों का परिवीक्षा काल (Probation Period) अभी पूरा नहीं हुआ है, वे सामान्यतः इस प्रक्रिया में भाग नहीं ले पाएंगे, जब तक कि कोई विशेष प्रशासनिक कारण न हो।

पारस्परिक स्थानांतरण का विकल्प

नीति में पारस्परिक (Mutual) स्थानांतरण का भी प्रावधान रखा गया है। यदि दो कर्मचारी एक-दूसरे के स्थान पर जाने के लिए सहमत हैं, तो वे संयुक्त रूप से आवेदन कर सकते हैं। इससे विभाग पर अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ता और रिक्त पदों की समस्या भी उत्पन्न नहीं होती। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों के कॉलेजों में पदस्थ स्टाफ को शहरी क्षेत्रों में लाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वहां पढ़ाई बाधित न हो। अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा गुण-दोष के आधार पर लिया जाएगा।