मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर स्थित व्हीकल फैक्ट्री (VFJ) ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। फैक्ट्री ने भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करते हुए 10 टी-72 टैंकों का एक और बैच तैयार कर रवाना कर दिया है। यह कदम देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।
मंगलवार को फैक्ट्री परिसर में आयोजित एक सादे लेकिन गरिमामय समारोह में इन टैंकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस दौरान फैक्ट्री के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। यह खेप सेना की बख्तरबंद कोर (Armoured Corps) को सौंपी जाएगी।
अत्याधुनिक तकनीक से हुए लैस
जानकारी के मुताबिक, ये टैंक पूरी तरह से नए नहीं हैं, बल्कि इनका वीएफजे में व्यापक स्तर पर ओवरहॉलिंग (Overhauling) किया गया है। सेना द्वारा उपयोग किए जाने के बाद इन टैंकों को मरम्मत और अपग्रेडेशन के लिए फैक्ट्री भेजा गया था। फैक्ट्री के कुशल तकनीशियनों और इंजीनियरों ने इनके इंजन, ट्रांसमिशन और फायरिंग सिस्टम को दुरुस्त कर इन्हें ‘नया जीवन’ दिया है। अब ये टैंक युद्ध के मैदान में फिर से अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं।
लक्ष्य से आगे निकलने की तैयारी
व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर को इस वित्तीय वर्ष में सेना के लिए टैंकों की मरम्मत और अपग्रेडेशन का एक निश्चित लक्ष्य दिया गया था। प्रबंधन का दावा है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने उत्पादन लक्ष्य को पूरा कर लेंगे। 10 टैंकों का यह बैच उसी कड़ी का एक हिस्सा है। इससे पहले भी फैक्ट्री ने अलग-अलग चरणों में टैंकों की आपूर्ति की है।
“गुणवत्ता और समयबद्ध आपूर्ति हमारी प्राथमिकता है। यह बैच सेना के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।” — वरिष्ठ अधिकारी (प्रतीकात्मक)
ट्रक निर्माण से टैंक ओवरहॉलिंग तक का सफर
गौरतलब है कि जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री मुख्य रूप से सेना के लिए स्टालियन (Stallion) और एलपीटीए (LPTA) जैसे भारी वाहनों के निर्माण के लिए जानी जाती रही है। हालांकि, बदलते दौर और सेना की बदलती जरूरतों को देखते हुए फैक्ट्री ने अपनी कार्यक्षमता का विस्तार किया है। पिछले कुछ वर्षों में वीएफजे ने टी-72 और टी-90 भीष्म टैंकों के इंजन और असेंबली के काम में महारत हासिल की है।
इससे पहले भी फैक्ट्री ने माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल (MPV) और सारंग तोप के लिए वाहनों का निर्माण कर अपनी क्षमता साबित की थी। पिछले साल भी फैक्ट्री ने निर्धारित समय से पहले टैंकों की एक बड़ी खेप सेना को सौंपकर रिकॉर्ड बनाया था, जिसकी रक्षा मंत्रालय ने भी सराहना की थी।
इस नई खेप के रवाना होने से न केवल फैक्ट्री के कर्मचारियों में उत्साह है, बल्कि यह जबलपुर के रक्षा उत्पादन इकोसिस्टम के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।