इंदौर दूषित जल कांड: राज्य सरकार ने गठित की उच्च स्तरीय जांच समिति, पीएस स्तर के अधिकारी करेंगे पड़ताल

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई जनहानि के मामले को राज्य सरकार ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस पूरी घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति (High Level Committee) का गठन किया गया है। यह समिति न केवल घटना के कारणों का पता लगाएगी, बल्कि इसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय करेगी।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस जांच दल में मंत्रालय स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह तकनीकी और प्रशासनिक, दोनों पहलुओं से मामले की गहन पड़ताल करे। इसमें पानी की सप्लाई लाइन, ड्रेनेज सिस्टम के साथ मिलान (Intermixing) और जल शोधन की प्रक्रियाओं का बारीकी से निरीक्षण किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यपरक हो।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि हाल ही में इंदौर के कुछ रिहायशी इलाकों में दूषित जल वितरण की गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। दूषित पानी के सेवन से कई लोग बीमार पड़ गए थे और दुर्भाग्यपूर्ण रूप से कुछ नागरिकों की मृत्यु भी हो गई थी। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे। पुरानी घटनाओं का संदर्भ लें तो, पूर्व में भी शहर के कुछ हिस्सों में गंदे पानी की समस्या को लेकर रहवासियों ने आवाज उठाई थी, जिसे अब गंभीरता से देखा जा रहा है।

जांच के प्रमुख बिंदु और कार्रवाई

गठित समिति मुख्य रूप से यह देखेगी कि जल वितरण लाइनों में लीकेज कहां और कैसे हुआ। साथ ही, यह भी जांचा जाएगा कि रहवासियों द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद मैदानी अमले ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हैं और पेयजल आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी वितरण प्रणाली का ऑडिट भी किया जा सकता है।