प्रयागराज माघ मेले में ‘शंकराचार्य’ की पदवी को लेकर छिड़ा विवाद अब और गहरा गया है। मेला प्रशासन और संत समाज के बीच का यह टकराव अब कानूनी दांव-पेच और सियासी बयानबाजी में बदल चुका है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन के नोटिस का कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने अपने वकीलों के माध्यम से 8 पन्नों का विस्तृत स्पष्टीकरण भेजा है। खास बात यह रही कि जब यह जवाब देने के लिए उनकी टीम दफ्तर पहुंची, तो वहां कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिला। इसके बाद समर्थकों ने जवाब की कॉपी दफ्तर के गेट पर ही चस्पा कर दी।
प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने मंगलवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया था। इसमें उनके ‘ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य’ के रूप में खुद को प्रस्तुत करने पर सवाल उठाए गए थे। प्रशासन का तर्क था कि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए पदवी का इस्तेमाल नियमों के खिलाफ है।
दफ्तर के बाहर हाई-वोल्टेज ड्रामा
बुधवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की लीगल टीम और अनुयायी सेक्टर-4 स्थित मेला प्राधिकरण के कार्यालय पहुंचे। टीम का दावा है कि वे नोटिस का जवाब देने गए थे, लेकिन वहां कोई भी सक्षम अधिकारी मौजूद नहीं था। काफी देर तक इंतजार करने के बाद संतों और समर्थकों ने वहीं अपना विरोध दर्ज कराया। अंत में, उन्होंने 8 पन्नों के लिखित जवाब को कार्यालय के मुख्य द्वार पर ही चिपका दिया। यह घटना अब चर्चा का विषय बनी हुई है।
‘करोड़ों हिंदुओं की आस्था का अपमान’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से सीनियर वकील अंजनी कुमार मिश्रा ने जवाब तैयार किया है। पत्र में मेला प्रशासन के नोटिस को बेहद अपमानजनक बताया गया है।
“प्रशासन का यह कदम न केवल अनुचित है, बल्कि यह करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। धार्मिक पदों पर इस तरह का प्रशासनिक हस्तक्षेप भावनाओं को आहत करता है।” — अंजनी कुमार मिश्रा, वकील