Delhi News : मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की ब्रीफिंग करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी (अभियोजन स्वीकृति) देने पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय ले। कानूनी जानकारों के मुताबिक, सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले का ट्रायल इंदौर की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में शुरू हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की लेत-लतीफी पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) अपनी रिपोर्ट सौंप चुका है, लेकिन सरकार महीनों से इस पर कुंडली मारकर बैठी है। चूंकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव फिलहाल वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में हिस्सा लेने के लिए स्विट्जरलैंड के दावोस गए हुए हैं और वे 23 जनवरी तक वापस लौटेंगे, इसलिए माना जा रहा है कि उनकी वापसी के बाद ही सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला लेगी।
एसआईटी रिपोर्ट में अभियोजन की मांग
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट को खोला। रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद बेंच ने पाया कि जांच एजेंसी ने अलग-अलग पहलुओं की गहन पड़ताल के बाद मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार की मंजूरी मांगी है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून सरकार पर दायित्व डालता है कि वह समय सीमा के भीतर निर्णय ले।
“हमें सूचित किया गया है कि मामला यहां लंबित होने के कारण राज्य द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हम मध्य प्रदेश राज्य को कानून के अनुसार मंजूरी हेतु उचित कदम उठाने का निर्देश देते हैं।” — सुप्रीम कोर्ट बेंच
‘अब माफी का वक्त नहीं बचा’
सुनवाई के दौरान विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने दलील दी कि उनके मुवक्किल का इरादा गलत नहीं था और उन्होंने अपनी टिप्पणियों के लिए पहले ही माफी मांग ली थी। इस पर अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में माफीनामा कहीं नहीं है और अब माफी के लिए बहुत देर हो चुकी है। कोर्ट ने कहा कि मंत्री का बयान शपथ के विपरीत है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए एक बयान से जुड़ा है। इस पर विवाद बढ़ने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने एफआईआर की प्रक्रिया भी तय कर दी थी।
इसके बाद विजय शाह ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) दायर की थी। इंदौर एमपी-एमएलए कोर्ट में केस चलने की संभावना प्रबल हो गई है।
पुराने बयानों की भी हुई जांच
सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई एसआईटी रिपोर्ट में केवल मौजूदा घटना ही नहीं, बल्कि विजय शाह के पुराने बयानों का भी जिक्र है। याचिकाकर्ता जय ठाकुर ने मंत्री के पुराने विवादित बयानों को भी कोर्ट के सामने रखा था।
एसआईटी ने कोर्ट के निर्देश पर इन सभी बयानों की जांच कर चार्जशीट तैयार कर ली है। हालांकि, सरकार की ओर से ‘सैंक्शन फॉर प्रॉसिक्यूशन’ (अभियोजन स्वीकृति) नहीं मिलने के कारण कोर्ट अब तक इस पर संज्ञान (Cognizance) नहीं ले पा रहा था।
विवादों से रहा है पुराना नाता
विजय शाह का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी को लेकर दिए गए एक बयान के कारण उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हाल ही में उन्होंने रतलाम जिले में ‘लाड़ली बहनों’ को लेकर भी एक बयान दिया था, जिस पर विपक्षी दल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और उन्हें पद से हटाने की मांग की थी।
अब सुप्रीम कोर्ट के दो हफ्ते के अल्टीमेटम के बाद फरवरी के पहले सप्ताह में होने वाली अगली सुनवाई मंत्री के राजनीतिक भविष्य के लिए अहम होगी।