भारतीय सराफा बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों ने आज, यानी 21 जनवरी को एक नया इतिहास रच दिया है। सोने की कीमत पहली बार 1.50 लाख रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, आज सोना 1,55,204 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर खुला। हालांकि, कारोबारी सत्र के अंत में इसमें मामूली सुधार देखा गया और यह 6,818 रुपये की बढ़त के साथ 1,54,227 रुपये पर बंद हुआ।
बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल की शुरुआत से अब तक, यानी महज 21 दिनों में सोना 21,032 रुपये महंगा हो चुका है। कल यह 1,47,409 रुपये के स्तर पर था। दूसरी ओर, चांदी की चमक भी लगातार बढ़ रही है।
आज 1 किलो चांदी 3,20,075 रुपये पर खुली और अंत में 9,752 रुपये की तेजी के साथ 3,19,097 रुपये पर बंद हुई। चांदी में इस साल अब तक 88,677 रुपये की भारी बढ़त दर्ज की गई है।
रिकॉर्ड तेजी की प्रमुख वजहें
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला, वैश्विक स्तर पर बढ़ता तनाव। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर दिखाए गए रुख और यूरोपीय देशों को टैरिफ की धमकी ने बाजारों में अस्थिरता पैदा कर दी है। जब भी ‘ट्रेड वॉर’ की स्थिति बनती है, निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने का रुख करते हैं।
दूसरा बड़ा कारण भारतीय रुपये की कमजोरी है। डॉलर के मुकाबले रुपया आज ₹91.10 के अपने ऑल-टाइम लो पर पहुंच गया है। LKP सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी बताते हैं कि रुपये की इस कमजोरी के कारण भारत में आयातित सोने की ‘लैंडिंग कॉस्ट’ काफी बढ़ गई है, जिसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर दिख रहा है।
इसके अलावा, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, जिनमें आरबीआई भी शामिल है, अपने भंडार में लगातार सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं, जिससे सप्लाई के मुकाबले डिमांड ज्यादा है।
चांदी क्यों बन रही है ‘नया सोना’?
चांदी की कीमतों में उछाल के पीछे केवल निवेश मांग नहीं, बल्कि औद्योगिक जरूरतें भी हैं। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री में चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसके अलावा, अमेरिकी टैरिफ के डर से मैन्युफैक्चरर्स ने पहले ही चांदी का स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव है।
भविष्य का अनुमान: ₹4 लाख तक जा सकती है चांदी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी अभी थमने वाली नहीं है। रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी का अनुमान है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है, तो 2026 में सोना 1,90,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। वहीं, चांदी के 4 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने भी 2026 में चांदी के 3.20 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। सैमको सिक्योरिटीज का मानना है कि तकनीकी आधार पर चांदी 3.94 लाख रुपये के स्तर को भी छू सकती है। ग्लोबल इन्वेस्टर रॉबर्ट कियोसाकी ने डॉलर की कमजोरी को देखते हुए चांदी के 200 डॉलर प्रति औंस तक जाने की भविष्यवाणी की है।
बीते साल का प्रदर्शन
आंकड़े बताते हैं कि पिछला साल यानी 2025 निवेशकों के लिए शानदार रहा। 2025 में सोने की कीमत में 75% (57,033 रुपये) की वृद्धि हुई थी। वहीं, चांदी ने 167% का रिटर्न दिया और इसके दाम 1.44 लाख रुपये बढ़े थे। 31 दिसंबर 2024 को जो चांदी 86,017 रुपये थी, वह 2025 के अंत तक 2.30 लाख रुपये के पार पहुंच गई थी।