राजस्थान में सरकारी भर्तियों में फर्जीवाड़े की जांच की आंच अब पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश तक पहुंच गई है। राजस्थान पुलिस की एक विशेष टीम फर्जी डिग्री मामले (Fake Degree Case) की तह तक जाने के लिए भोपाल और सीहोर में छापेमारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस के हाथ कुछ अहम सुराग लगे हैं, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है।
जांच एजेंसी को शक है कि राजस्थान में नौकरी पाने वाले कई अभ्यार्थियों ने मध्य प्रदेश की निजी यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों से बैक डेट में डिग्रियां बनवाई हैं। इसी सिलसिले में पुलिस टीम स्थानीय इनपुट के आधार पर दलालों और संदिग्ध संस्थानों के रिकॉर्ड खंगाल रही है।
भोपाल से सीहोर तक दबिश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजस्थान पुलिस की टीम सबसे पहले भोपाल पहुंची। यहां कुछ संदिग्ध ठिकानों पर पूछताछ के बाद टीम सीहोर के लिए रवाना हुई। बताया जा रहा है कि सीहोर स्थित एक निजी विश्वविद्यालय के कुछ दस्तावेज जांच के दायरे में हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या बिना क्लास अटेंड किए और बिना परीक्षा दिए छात्रों को डिग्रियां बांटी गई थीं।
क्या है पूरा मामला?
राजस्थान में पीटीआई (शारीरिक शिक्षक) और अन्य सरकारी भर्तियों में दस्तावेज सत्यापन के दौरान कई डिग्रियां संदिग्ध पाई गई थीं। जब इन डिग्रियों की जांच शुरू हुई, तो इनके तार मध्य प्रदेश के शिक्षण संस्थानों से जुड़े मिले। यह नेटवर्क केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई जिलों में फैले हुए हैं।
इससे पहले भी जांच एजेंसियों ने फर्जी डिग्री गिरोह का भंडाफोड़ किया था। उस दौरान भी यह बात सामने आई थी कि दलाल मोटी रकम लेकर छात्रों को घर बैठे डिग्री उपलब्ध करवाते थे। पुरानी जांचों में मिले इनपुट्स के आधार पर ही पुलिस अब नेटवर्क की जड़ों को काटने का प्रयास कर रही है।
एजेंटों में हड़कंप
राजस्थान पुलिस की इस अचानक कार्रवाई से शिक्षा माफिया और डिग्री का धंधा करने वाले एजेंटों में हड़कंप मच गया है। पुलिस उन बिचौलियों की तलाश कर रही है, जिन्होंने छात्रों को एमपी के संस्थानों से डिग्रियां दिलवाने में मदद की थी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं और कई अहम दस्तावेज जब्त किए जा सकते हैं।