इंदौर में 23 जनवरी 2026 से तीसरे नेशनल हिप कोर्स और इंडोकॉन का आगाज होने जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस चिकित्सा सम्मेलन में देश भर के ऑर्थोपेडिक सर्जन, जॉइंट रिप्लेसमेंट एक्सपर्ट्स और रिसर्चर्स जुटेंगे। आयोजन का मुख्य आकर्षण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सर्जरी तकनीक और कैडेवर कोर्स होगा, जिसमें पहली बार 100 से अधिक डेलिगेट्स हिस्सा लेंगे।
इस सम्मेलन में हिप सर्जरी, ट्रॉमा केयर और रोबोटिक सर्जरी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर मंथन किया जाएगा। विशेष बात यह है कि इंग्लैंड, साउथ कोरिया और कनाडा से तीन इंटरनेशनल फैकल्टी भी इसमें शामिल हो रही हैं, जो भारतीय सर्जनों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगी।
एआई और आधुनिक तकनीक पर फोकस
सम्मेलन में एआई आधारित हिप सर्जरी तकनीक पर एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें विशेषज्ञ बताएंगे कि कैसे 3डी प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग, इमेज-बेस्ड एनालिसिस और नेविगेशन सिस्टम के जरिए सर्जरी को अधिक सटीक और सुरक्षित बनाया जा सकता है। प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन के जरिए प्रतिभागियों को आधुनिक सर्जिकल उपकरणों और इम्प्लांट्स के वास्तविक उपयोग की जानकारी दी जाएगी।
“इन तीन दिनों में शहर की ऑर्थोपेडिक और सर्जिकल फील्ड की बढ़ती हुई क्षमता देखने को मिलेगी। हमारा फोकस ‘हिप प्रिज़र्वेशन’ पर रहेगा, जो युवा मरीजों में प्राकृतिक जोड़ सुरक्षित रखने में मदद करती है। यह सम्मेलन सिर्फ अकादमिक चर्चा का मंच नहीं, बल्कि स्किल और टेक्नॉलॉजी के ट्रांसफर का मौका भी है।” — डॉ. हेमंत मंडोवरा, कॉन्फ्रेंस चेयरमैन
बढ़ते सड़क हादसे और हिप फ्रैक्चर
कॉन्फ्रेंस के सेक्रेटरी डॉ. अर्जुन जैन ने बताया कि हाल के वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं के कारण हिप फ्रैक्चर के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसके अलावा, लाइफ एक्सपेक्टेंसी बढ़ने से बुजुर्गों में भी कूल्हे से जुड़ी समस्याएं आम हो गई हैं। डॉ. जैन के अनुसार, इस वर्ष पहली बार यूके से आए डॉ. मालवीया के साथ मिलकर कैडेवर पर हिप आर्थ्रोस्कोपी का लाइव डेमोंस्ट्रेशन होगा। इसका उद्देश्य पारंपरिक ऑर्थोपेडिक्स को उभरती तकनीकों के साथ जोड़ना है।
कार्यक्रम का शेड्यूल और विषय
आयोजन की शुरुआत 23 जनवरी को इरकाड इंडिया (IRCAD India) में कैडेवरिक वर्कशॉप से होगी। यहां सर्जनों को कॉम्प्लेक्स हिप सर्जरी की हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद 24 और 25 जनवरी को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में वैज्ञानिक सत्र आयोजित होंगे।
कोर्स कन्वेनर डॉ. अभिजीत पंडित ने बताया कि वैज्ञानिक सत्रों में बायोमैकेनिक्स, इम्प्लांट डिजाइन और सर्जिकल टेक्नोलॉजी पर जोर दिया जाएगा। वहीं, कॉन्फ्रेंस के साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. एस. के. लुनावत ने बताया कि इस बार की थीम “एवरीथिंग अराउंड हिप” रखी गई है, जिसमें कूल्हे की फ्रैक्चर सर्जरी से लेकर आर्थ्रोप्लास्टी तक सभी विषयों पर चर्चा होगी। इससे मध्य भारत के मरीजों को भविष्य में बेहतर उपचार मिल सकेगा।