भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का बढ़ता वैश्विक प्रभाव, NHAI ने बनाए चार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

भारत की इंजीनियरिंग दक्षता लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। देश में तैयार हो रही आधुनिक आधारभूत संरचनाएं और रिकॉर्ड तोड़ परियोजनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि भारत तकनीकी उत्कृष्टता के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा बनाया गया एक नया रिकॉर्ड भारत की मजबूत इंजीनियरिंग क्षमता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है।

एनएचएआई ने बनाए चार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

एनएचएआई ने बेंगलुरु-कडपा-विजयवाड़ा इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना पर एक साथ चार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। इन रिकॉर्ड्स में 24 घंटे के भीतर सबसे लंबी लगातार बिटुमिनस कंक्रीट सड़क बिछाने का रिकॉर्ड शामिल है। इसके अलावा, 24 घंटे में 10,655 मीट्रिक टन बिटुमिनस कंक्रीट बिछाने, कुल 57,500 मीट्रिक टन बिटुमिनस कंक्रीट लगातार बिछाने और 156 लेन किलोमीटर, यानी तीन लेन चौड़ी 52 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण करने जैसे रिकॉर्ड भी शामिल हैं। ये उपलब्धियां भारत की आधुनिक निर्माण तकनीकों और कुशल इंजीनियरिंग प्रबंधन को दर्शाती हैं।

अटल टनल सहित कई परियोजनाएं बनीं मिसाल

भारत में केवल सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि कई अन्य परियोजनाएं भी इंजीनियरिंग के चमत्कार के रूप में पहचानी जा रही हैं। इनमें अटल टनल एक प्रमुख उदाहरण है, जिसे दुनिया की सबसे लंबी हाई-एल्टीट्यूड टनल माना जाता है। यह परियोजना कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भारत की तकनीकी क्षमता और नवाचार का प्रमाण है।

तकनीकी शिक्षा को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 2025-26 से 2029-30 की अवधि के लिए 4,200 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। यह राशि देश के 275 तकनीकी संस्थानों में आधुनिक तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उपयोग की जाएगी। इससे आने वाले वर्षों में भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत पहचान

इन सभी उपलब्धियों और निवेश योजनाओं से स्पष्ट है कि भारत न केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में आगे बढ़ रहा है, बल्कि भविष्य की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी मानव संसाधन क्षमता को भी मजबूत कर रहा है। यह प्रगति भारत को वैश्विक स्तर पर इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के एक मजबूत केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है।