MP में अटैच शिक्षकों पर सरकार की सख्ती, मूल स्कूल में हाजिरी के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

भोपाल। मध्य प्रदेश में स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि विभिन्न दफ्तरों और नेताओं के साथ अटैच किए गए शिक्षकों को अब हर हाल में अपने मूल स्कूल लौटना होगा। विभाग के अनुसार, अक्टूबर महीने का वेतन तभी जारी किया जाएगा जब शिक्षक अपनी मूल पदस्थापना वाले स्कूल में उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

यह फैसला राज्य के हजारों शिक्षकों को प्रभावित करेगा जो सालों से कक्षाओं में पढ़ाने के बजाय मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और विभिन्न सरकारी कार्यालयों में अटैच होकर काम कर रहे हैं। इस व्यवस्था के कारण, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो गई थी, जिसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा था।

वेतन व्यवस्था में बड़ा बदलाव

नए आदेश के तहत वेतन भुगतान की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया गया है। अब अटैच शिक्षकों का वेतन उनके मूल स्कूल के आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) द्वारा ही जारी किया जाएगा। DDO को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित शिक्षक स्कूल में नियमित रूप से उपस्थित हैं। उनकी उपस्थिति एजुकेशन पोर्टल पर दर्ज होने के बाद ही वेतन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस कदम से अब किसी भी स्तर पर अटैचमेंट को जारी रखना लगभग असंभव हो जाएगा।

क्यों पड़ी इस फैसले की जरूरत?

लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि शिक्षक अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर शहरों में या सुविधाजनक कार्यालयों में अटैचमेंट करा लेते हैं। इनमें मंत्री, विधायक, सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर कलेक्टर कार्यालय और अन्य विभाग शामिल हैं। इसके चलते दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के स्कूल शिक्षक विहीन हो जाते थे, जिससे शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा था। सरकार ने शिक्षण व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए यह कड़ा फैसला लिया है।

अटैचमेंट कल्चर पर लगेगी लगाम

सरकार के इस निर्देश का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में चल रहे ‘अटैचमेंट कल्चर’ को खत्म करना है। विभाग का मानना है कि शिक्षक का मूल काम पढ़ाना है और उन्हें कक्षा में ही होना चाहिए। इस आदेश के बाद उन सभी शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से अपने मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में लौटना होगा, जो कहीं और सेवाएं दे रहे हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले से स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।