बसंत पंचमी : उज्जैन में नील सरस्वती माता के मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब, प्रतिमा पर बच्चों ने चढ़ाई स्याही

Basant Panchami 2026: धर्मनगरी उज्जैन में आज बसंत पंचमी का पर्व पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। शहर की सिंहपुरी गली इस खास मौके पर पूरी तरह पीले रंग में सराबोर नजर आई। यहां स्थित करीब 500 साल पुराने माता सरस्वती के मंदिर में सुबह से ही दर्शनार्थियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हो रहे है।

बसंत पंचमी को ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी आस्था के चलते स्कूली बच्चों से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र अपने अभिभावकों के साथ मंदिर पहुंच रहे है। विद्यार्थी माता के चरणों में शीश नवाकर बुद्धि, प्रखर स्मरण शक्ति और आगामी परीक्षाओं में सफलता का आशीर्वाद मांग रहे है।
मुगलकालीन है माता की प्रतिमा
पौराणिक मान्यता है कि सिंहपुरी स्थित यह मंदिर ऐतिहासिक महत्व रखता है। गर्भगृह में विराजमान माता सरस्वती की पाषाण प्रतिमा मुगल काल की है। यहां माता सरस्वती को स्याही चढ़ाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है।

उज्जैन में अनोखा मंदिर, यहां मां सरस्वती को होता है स्याही का अर्पण, बढ़ जाती है

ऐसी मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन मां शारदा विद्यार्थियों को ज्ञान का वरदान देती हैं। मान्यता है कि “बसंत पंचमी पर माता सरस्वती को स्याही अर्पित करने से स्मरण शक्ति तेज होती है और ज्ञान का विकास होता है। इसी आस्था के चलते दूर-दूर से विद्यार्थी यहां आते है।”
पीले फूलों और चावल से विशेष पूजा
सुबह से मंदिर परिसर में विद्यार्थियों के लिए विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने पीले फूल, पीले चावल और प्रसाद चढ़ाकर माता को प्रसन्न किया। बच्चों ने न केवल स्याही, बल्कि अपनी कलम और किताबें भी माता के समक्ष अर्पित की।
सिंहपुरी गली स्थित यह प्राचीन देवालय हर साल बसंत पंचमी पर शिक्षा जगत से जुड़े लोगों और विद्यार्थियों की श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन जाता है, जहां वे अपने उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।