‘माझा काका’: 20 साल बाद ‘सामना’ में राज ठाकरे का लेख, बालासाहेब को बताया ‘पहाड़ जैसा सहारा’

Mumbai News : महाराष्ट्र की राजनीति में एक लंबे अरसे बाद एक दुर्लभ और भावुक पल देखने को मिला है। शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की जयंती और उनके जन्म शताब्दी वर्ष के आगाज पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने ‘सामना’ अखबार के लिए एक विशेष संपादकीय लिखा है।
‘माझा काका’ (मेरे काका) शीर्षक से प्रकाशित यह लेख पिछले 20 वर्षों में ‘सामना’ में राज ठाकरे का पहला लेख है। इसे न केवल एक पारिवारिक श्रद्धांजलि के तौर पर देखा जा रहा है, बल्कि यह राज्य के सियासी समीकरणों में बड़े बदलाव का संकेत भी दे रहा है।
राज ठाकरे ने अपने इस लेख में बालासाहेब ठाकरे के साथ अपने रिश्तों की गहराई को बयां किया है। उन्होंने लिखा है कि बालासाहेब उनके लिए सिर्फ एक मार्गदर्शक नहीं थे, बल्कि एक ‘पहाड़ जैसा सहारा’ थे। राज ने स्वीकार किया कि अगर बालासाहेब का मजबूत समर्थन उनके साथ नहीं होता, तो शायद वे कभी अपनी अलग राजनीतिक राह बनाने का साहस नहीं जुटा पाते।

“बालासाहेब का व्यक्तित्व और उनकी निडर कलात्मकता ही थी, जिसने मुझे सत्ता और पाखंड को बिना डरे चुनौती देना सिखाया। उनके कार्टूनों के ‘बोल्ड स्ट्रोक्स’ ने मुझे जीवन में बहुत कुछ सिखाया है।” — राज ठाकरे

सियासी मायने और ‘ठाकरे ब्रांड’ की एकजुटता
राजनीतिक विश्लेषक इस लेख को महज एक भावनात्मक श्रद्धांजलि नहीं मान रहे हैं। यह लेख ऐसे समय में आया है जब ठाकरे परिवार के दोनों भाई, उद्धव और राज, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन के खिलाफ एक ही राजनीतिक धारा में खड़े नजर आ रहे हैं।
‘सामना’ जो कि उद्धव ठाकरे गुट का मुखपत्र है, उसमें राज ठाकरे की वापसी को ‘ठाकरे ब्रांड’ की एकजुटता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
जानकारों का मानना है कि यह कदम शिवसेना कैडर और मनसे कार्यकर्ताओं के बीच की दूरी को कम करने की एक कोशिश हो सकती है। आगामी चुनावों और राजनीतिक संघर्षों में सत्तारूढ़ गठबंधन को चुनौती देने के लिए यह मराठी वोट बैंक के एकीकरण की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
पाकिस्तानी कलाकारों और दिग्गजों का जिक्र
अपने लेख में राज ठाकरे ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए राज कपूर और अमिताभ बच्चन जैसे फिल्म जगत के दिग्गजों से जुड़े किस्सों का भी जिक्र किया है। इसके अलावा, उन्होंने पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर अपने कड़े रुख पर भी सफाई दी है।
राज ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी व्यक्तिगत नफरत का नतीजा नहीं है। यह वह ‘सांस्कृतिक सोच’ है जो उन्हें अपने काका बालासाहेब से विरासत में मिली है।
भविष्य की भूमिका पर संकेत
लेख के अंत में राज ठाकरे ने राज्य के हित में अपनी भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। उन्होंने इशारा किया है कि वे भविष्य में निजी राजनीतिक लाभ के बजाय महाराष्ट्र के हित में ‘अहम भूमिका’ निभा सकते हैं।
20 साल बाद ‘सामना’ के पन्नों पर राज की वापसी ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ‘कलम की एकजुटता’ क्या चुनावी मैदान में भी किसी गठबंधन की शक्ल लेती है।