अमेरिका-ईरान तनाव: अरब सागर पहुंचा USS अब्राहम लिंकन, ट्रम्प प्रशासन ने तैयार किया ‘निर्णायक’ सैन्य प्लान

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने की स्थिति में हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ ऐसे सैन्य विकल्पों की मांग की है, जिनका असर ‘निर्णायक’ हो। पेंटागन और व्हाइट हाउस ने इन योजनाओं पर काम तेज कर दिया है, जिसमें ईरानी शासन को सत्ता से हटाने की रणनीति भी शामिल बताई जा रही है।
इस बीच, अमेरिकी नौसेना का विशाल जंगी बेड़ा USS अब्राहम लिंकन अरब सागर में दाखिल हो चुका है। आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका किसी भी वक्त ईरान पर अचानक सैन्य कार्रवाई कर सकता है। अमेरिकी गतिविधियों को देखते हुए ईरान ने भी चेतावनी दी है कि खाड़ी में मौजूद सभी अमेरिकी मिलिट्री बेस उनकी मिसाइलों के निशाने पर हैं।
मिडिल ईस्ट में अमेरिकी किलेबंदी
रिपोर्ट्स के अनुसार, USS अब्राहम लिंकन अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के जोन में प्रवेश कर चुका है। यह युद्धपोत पहले साउथ चाइना सी में तैनात था। 18 जनवरी को मलक्का स्ट्रेट पार करने के बाद इसने हिंद महासागर में प्रवेश किया।
रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि यह जंगी जहाज 20 नॉट से ज्यादा की रफ्तार से आगे बढ़ा और अपनी लोकेशन गुप्त रखने के लिए इसने अपना ऑटोमैटिक पहचान सिस्टम (AIS) बंद कर दिया था।
इस एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ कई डेस्ट्रॉयर जहाज और परमाणु पनडुब्बियां भी चल रही हैं। इस पर 48 से 60 F/A-18 फाइटर जेट तैनात हैं, जो बिना ईंधन भरे 2300 किलोमीटर दूर तक हमला करने में सक्षम हैं। इसके अलावा, अमेरिका का C 37-B एयरक्राफ्ट ईरान के उत्तर में तुर्कमेनिस्तान के अशगाबाद बेस पर पहुंच गया है।
जॉर्डन में फाइटर जेट्स और मिसाइल सिस्टम तैनात
अमेरिका ने अपनी तैयारियों को पुख्ता करते हुए जॉर्डन में भी मोर्चा संभाला है। रॉयटर्स के मुताबिक, यूएस एयरफोर्स ने वहां कम से कम 12 F-15 फाइटर जेट्स तैनात किए हैं और कई अन्य विमान रास्ते में हैं। 20 से 22 जनवरी के बीच अमेरिकी C-17 सैन्य ट्रांसपोर्ट विमानों ने जॉर्डन के मफराक अल-खवाजा एयरबेस पर कई उड़ानें भरीं।
इन विमानों के जरिए पैट्रियट-3 मिसाइल डिफेंस सिस्टम लाए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य इजराइल को ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई से बचाना है। हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया अमेरिकी सैन्य अड्डे पर भी कार्गो विमानों की आवाजाही बढ़ गई है, जो संभावित बड़े सैन्य ऑपरेशन के लिए रसद और सैनिकों की तैनाती का संकेत है।
ईरान की चेतावनी: ‘उंगली ट्रिगर पर है’
अमेरिकी तैयारियों के जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। ईरानी सुप्रीम काउंसिल के सदस्य जावेद अकबरी ने साफ कहा है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सभी सैन्य अड्डे उनके निशाने पर हैं।

“हमारी मिसाइलें आदेश के इंतजार में दुश्मन पर गरजने को तैयार हैं। अगर अमेरिका ने हमला किया, तो मिडिल ईस्ट में उसके सभी बेस और इजराइल के प्रमुख केंद्र हमारे टारगेट पर होंगे।” — जनरल अली अब्दोल्लाही, वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर मोहम्मद पाकपुर ने एक लिखित बयान में कहा कि उनकी सेना की उंगली ट्रिगर पर है और वे पहले से कहीं ज्यादा तैयार हैं।
इजराइल का दावा: 7 गुना ताकत से देंगे जवाब
इस तनाव के बीच इजराइल ने भी ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। इजराइल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बरकात ने स्विट्जरलैंड के दावोस में कहा कि अगर ईरान ने इजराइल के खिलाफ कोई कदम उठाया, तो उसे पहले से ‘सात गुना ज्यादा ताकत’ से जवाब दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि पिछली कार्रवाइयों में इजराइल ने ईरान की सैन्य कमजोरियों को पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया है।
ईरान में आंतरिक अशांति और मौतों का आंकड़ा
बाहरी खतरों के साथ-साथ ईरान आंतरिक विरोध प्रदर्शनों से भी जूझ रहा है। रॉयटर्स ने एक ईरानी अधिकारी के हवाले से पुष्टि की है कि देश में महंगाई के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों में अब तक 5000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। अमेरिकी मानवाधिकार संगठन HRANA ने 4519 मौतों की पुष्टि की है।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन’ की वकालत करते हुए कहा है कि वहां नए नेतृत्व का समय आ गया है। हालांकि, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन हालात के लिए ट्रम्प को जिम्मेदार ठहराया है।