सीएम डॉ. मोहन यादव का दिखा अलग अंदाज, मंच पर दोनों हाथों से लाठी घुमाकर दिखाए हैरतअंगेज करतब

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सियासत के दांव-पेच के साथ-साथ अखाड़े के दांव भी बखूबी जानते हैं। अपने गृह नगर उज्जैन के प्रवास के दौरान सीएम का एक अलग ही रूप देखने को मिला। अक्सर गंभीर राजनीतिक मुद्दों पर बात करने वाले मुख्यमंत्री ने मंच पर शस्त्र कला का प्रदर्शन कर सबको चौंका दिया। उन्होंने दोनों हाथों में लाठी लेकर उसे इतनी कुशलता से घुमाया कि वहां मौजूद हर शख्स देखता ही रह गया।

उज्जैन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जब सीएम मोहन यादव लोगों के बीच पहुंचे, तो माहौल पूरी तरह बदल गया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप और कार्यकर्ताओं के उत्साह के बीच मुख्यमंत्री ने अपने पुराने कौशल का प्रदर्शन किया। उन्होंने बनेटी (जलती हुई या सामान्य लाठी को तेजी से घुमाने की कला) का प्रदर्शन किया। जिस रफ्तार और संतुलन के साथ उन्होंने लाठी घुमाई, उसने उनकी शारीरिक दक्षता और पुराने अभ्यास की गवाही दी।

मंच पर दिखाए जौहर

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री जैसे ही मंच पर आए, उन्होंने लाठी थाम ली। इसके बाद उन्होंने दोनों हाथों से लाठी को हवा में लहराया। उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और मुस्कान साफ दिखाई दे रही थी। सुरक्षाकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी भी मुख्यमंत्री के इस अंदाज को देखकर हैरान थे। वहां मौजूद भीड़ ने तालियों की गड़गड़ाहट और नारों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। यह दृश्य बताता है कि डॉ. यादव अपनी जड़ों और संस्कृति से कितने गहरे जुड़े हुए हैं।

अखाड़ों से है पुराना नाता

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अखाड़ों और कुश्ती से पुराना नाता रहा है। राजनीति में आने से पहले और उसके दौरान भी वे उज्जैन की व्यायामशालाओं और अखाड़ों में सक्रिय रहे हैं। उज्जैन को मल्लखंब और कुश्ती का गढ़ माना जाता है, और डॉ. यादव इस परंपरा के संवाहक रहे हैं। जानकारों का कहना है कि लाठी घुमाना या बनेटी चलाना एक कठिन कला है, जिसके लिए कलाई में ताकत और एकाग्रता की जरूरत होती है। सीएम ने साबित कर दिया कि वे आज भी इस कला में पारंगत हैं।

पहले भी दिखा चुके हैं कौशल

यह पहली बार नहीं है जब डॉ. मोहन यादव ने सार्वजनिक रूप से अपने शस्त्र कौशल का प्रदर्शन किया हो। इससे पहले भी दशहरा उत्सव और शस्त्र पूजन कार्यक्रमों के दौरान उन्हें तलवारबाजी करते या लाठी चलाते देखा गया है। पुराने संदर्भों की बात करें तो विधायक और मंत्री रहते हुए भी वे अक्सर धार्मिक यात्राओं या अखाड़ों के कार्यक्रमों में इसी अंदाज में नजर आते थे। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां नेताओं को आम जनता से जोड़ने में मदद करती हैं। यह दिखाता है कि मुख्यमंत्री पद की व्यस्तताओं के बावजूद वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को नहीं भूले हैं। उज्जैन की जनता के लिए यह गर्व की बात थी कि उनके नेता ने मंच से अपनी परंपरा का मान बढ़ाया। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी का अभिवादन स्वीकार किया और युवाओं को शारीरिक फिटनेस के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी दिया।