मध्य प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पिछले कुछ दिनों की राहत के बाद प्रदेश में कड़ाके की ठंड लौट आई है। रविवार को राजधानी भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत करीब 15 शहरों में धूप के दर्शन नहीं हुए और दिनभर सर्द हवाओं का दौर चलता रहा।
मौसम विभाग के मुताबिक, इन शहरों में ‘कोल्ड-डे’ जैसी स्थिति बनी रही और सोमवार को भी कमोबेश ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है।
ठंड की वापसी के साथ ही प्रदेश में बारिश (मावठा) का अलर्ट भी जारी किया गया है। मौसम विज्ञानियों ने 27 और 28 जनवरी को राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर संभाग के कई जिले भीग सकते हैं।
क्यों बदला मौसम का मिजाज?
मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय हिमालय क्षेत्र के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय है। इसके साथ ही एक ट्रफ लाइन और साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी बना हुआ है। इन तीन वेदर सिस्टम के एक साथ सक्रिय होने से हवाओं का रुख बदल गया है और वातावरण में नमी आ रही है। इसी वजह से प्रदेश भर में कोहरा और सर्द हवाओं का असर दिखाई दे रहा है।
इन जिलों में बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 27 जनवरी को भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, टीकमगढ़, सागर, गुना, शिवपुरी और रतलाम समेत आसपास के जिलों में बारिश हो सकती है।
वहीं, 28 जनवरी को यह सिस्टम आगे की ओर बढ़ेगा। इस दिन जबलपुर, रीवा, सतना, पन्ना, छतरपुर, सीधी, शहडोल, उमरिया, कटनी और दमोह जैसे जिलों में मावठा गिरने के आसार हैं।
दिन और रात के तापमान में गिरावट
सर्द हवाओं के कारण दिन और रात दोनों के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। रविवार को गुना प्रदेश में सबसे ठंडा रहा, जहां दिन का अधिकतम तापमान महज 19.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा नौगांव, दतिया और श्योपुर में भी पारा 20 डिग्री के करीब रहा।
रात के तापमान की बात करें तो शनिवार-रविवार की दरमियानी रात राजगढ़ सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया। बड़े शहरों में ग्वालियर की रात सबसे सर्द रही, जहां पारा 8.4 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में रात का तापमान 11.9 डिग्री और इंदौर में 13.2 डिग्री सेल्सियस रहा।
जनवरी में क्यों गिरता है मावठा?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह मानसून के लिए जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण होते हैं, उसी तरह सर्दियों में दिसंबर और जनवरी का महीना सबसे अहम होता है। पिछले 10 सालों के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी में अक्सर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होते हैं, जिससे उत्तर भारत के पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होती है। इसे ही स्थानीय भाषा में ‘मावठा’ कहा जाता है, जो रबी की फसलों के लिए फायदेमंद माना जाता है।