भारतीय सेना में ‘नारी शक्ति’ की भागीदारी अब नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। युद्ध के मैदान से लेकर चिकित्सा सेवाओं तक, महिला अधिकारी हर मोर्चे पर अपनी काबिलियत साबित कर रही हैं। इसी कड़ी में कैप्टन डॉ. हर्षिता राघव ने एक नई मिसाल पेश की है।
उनकी उपलब्धियों को देखते हुए फरवरी 2025 में मध्य प्रदेश के राज्यपाल ने उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया। यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह सेना में बदलती महिलाओं की भूमिका का भी प्रतीक है।
कैप्टन डॉ. हर्षिता राघव ने 26 जनवरी को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर (RVC) की टुकड़ी का नेतृत्व किया था। इस दौरान उन्होंने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। वह दिसंबर 2023 में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त करने वाली महिला पशुचिकित्सा अधिकारी हैं। इतने कम समय में इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभाना उनके अनुशासन और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
राज्यपाल ने किया सम्मानित
महिला अधिकारियों के इस योगदान को रेखांकित करते हुए मध्य प्रदेश के राज्यपाल ने एक समारोह में उन्हें सम्मानित किया। कैप्टन हर्षिता के साथ नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (NDVSU) और कॉलेज ऑफ वेटरनरी साइंस, जबलपुर की तीन अन्य महिला RVC अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया। यह आयोजन राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर महिला पशुचिकित्सकों की बढ़ती भूमिका को मान्यता देने का एक प्रयास था।
विरासत में मिली देशसेवा
भोपाल की रहने वाली कैप्टन हर्षिता के लिए वर्दी का सम्मान नया नहीं है। वह दूसरी पीढ़ी की सैन्य अधिकारी हैं। उनके पिता ग्रुप कैप्टन प्रदीप कुमार राघव (सेवानिवृत्त) भारतीय वायुसेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। परिवार में राष्ट्रसेवा की यह परंपरा हर्षिता के लिए प्रेरणा का स्रोत रही है। पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए उन्होंने सेना की वर्दी पहनकर परिवार की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है।
शैक्षणिक उपलब्धियां और प्रेरणा
कैप्टन हर्षिता की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी उतनी ही मजबूत है। उन्होंने मुंबई वेटरनरी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित कॉलेज ऑफ वेटरनरी साइंस से स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। उनकी यह सफलता साबित करती है कि मध्य प्रदेश के पशुचिकित्सा संस्थान राष्ट्रीय स्तर के नेतृत्व तैयार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कैप्टन हर्षिता की यह उपलब्धि देशभर की छात्राओं के लिए एक बड़ा उदाहरण है। यह विशेष रूप से उन युवतियों को प्रोत्साहित करेगा जो पशुचिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई कर रही हैं और सेना या अर्धसैनिक बलों में अपना भविष्य देख रही है।
आज जब भारत नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में महिलाओं को देख रहा है, तो RVC की ये महिला अधिकारी सिद्ध कर रही हैं कि वे विज्ञान, चिकित्सा और अनुशासन के हर पैमाने पर खरी उतरती हैं।