दक्षिणावर्ती शंख: घर में सुख-समृद्धि के लिए 5 वास्तु नियम, असली-नकली की पहचान और स्थापना विधि

सनातन धर्म में पूजा-पाठ और अनुष्ठानों में शंख का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले 14 रत्नों में से एक शंख भी था। सामान्यतः घरों में वामवर्ती शंख का प्रयोग शंखनाद के लिए किया जाता है, लेकिन ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में दक्षिणावर्ती शंख को बेहद दुर्लभ और चमत्कारी माना गया है।

दक्षिणावर्ती शंख को साक्षात मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि जिस घर में यह शंख विधि-विधान से स्थापित होता है, वहां दरिद्रता कभी नहीं ठहरती। हालांकि, इसे घर में रखने के कुछ सख्त नियम हैं जिनका पालन न करने पर विपरीत परिणाम भी मिल सकते हैं।

दक्षिणावर्ती शंख का महत्व

शंख मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं—वामवर्ती और दक्षिणावर्ती। वामवर्ती शंख का पेट बाईं ओर खुलता है, जबकि दक्षिणावर्ती शंख का पेट दाईं ओर खुलता है। शास्त्रों में दक्षिणावर्ती शंख को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी दोनों का प्रिय बताया गया है। इसे बजाया नहीं जाता, बल्कि इसकी पूजा की जाती है। इसे ‘लक्ष्मी शंख’ भी कहा जाता है।

असली और नकली शंख की पहचान

बाजार में आजकल प्लास्टिक या रेजिन से बने नकली शंखों की भरमार है। असली दक्षिणावर्ती शंख की पहचान के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। असली शंख भारी होता है और उसकी सतह पर प्राकृतिक लकीरें या खुरदरापन हो सकता है।

नकली शंख बिल्कुल चिकना और कांच जैसा चमकदार होता है। असली शंख को कान पर लगाने पर उससे समुद्र की लहरों जैसी गूंज सुनाई देती है। इसके अलावा, असली शंख की चमक समय के साथ फीकी नहीं पड़ती, जबकि नकली शंख पीला पड़ सकता है।

घर में रखने के वास्तु नियम

वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिणावर्ती शंख को हमेशा पूजा घर में ही स्थापित करना चाहिए। इसे कभी भी जमीन पर नहीं रखना चाहिए। शंख को हमेशा लाल कपड़े पर या चांदी/तांबे के पात्र में रखना शुभ माना जाता है।

दिशा का ध्यान: शंख का मुख हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। शंख में जल भरकर रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस जल को पूरे घर में छिड़कने से वास्तु दोष कम होते हैं।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

शास्त्रों के अनुसार, पूजा घर में एक ही प्रकार के दो शंख नहीं रखने चाहिए। यदि आपके पास दक्षिणावर्ती शंख है, तो उसे बजाने वाले शंख से अलग रखें। भगवान शिव और सूर्य देव के जलाभिषेक में शंख का प्रयोग वर्जित माना गया है, इसलिए पूजा के दौरान इस नियम का पालन करें।

दक्षिणावर्ती शंख की कीमत उसके आकार, वजन और गुणवत्ता पर निर्भर करती है। बाजार में यह कुछ सौ रुपये से लेकर हजारों रुपये तक में उपलब्ध है। इसे खरीदते समय किसी जानकार या विश्वसनीय प्रतिष्ठान का ही चयन करें।

निष्कर्ष

दक्षिणावर्ती शंख न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी इसकी उपस्थिति वातावरण को शुद्ध करती है। सही विधि और श्रद्धा के साथ इसे स्थापित करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।