वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को लोकसभा में अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। इस बजट को मौजूदा वैश्विक हालात के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह ऐसे फैसले लेगी, जो देश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने में मदद करें।
अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने पर रहेगा फोकस
इस बार बजट में सीमा शुल्क ढांचे में बड़े सुधार देखने को मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि जीएसटी की तर्ज पर कस्टम ड्यूटी सिस्टम को सरल और व्यावहारिक बनाया जा सकता है, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिले। साथ ही सरकार कर्ज और जीडीपी के अनुपात को कम करने की दिशा में भी ठोस कदम उठा सकती है। अब राजकोषीय नीति केवल घाटे को नियंत्रित करने तक सीमित न रहकर, कुल कर्ज के बोझ को कम करने पर केंद्रित होती दिख रही है।
निजी करदाताओं को मिल सकती है राहत
पिछले साल 12 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स छूट और जीएसटी दरों में कटौती से करदाताओं को बड़ी राहत मिली थी। इस बार भी व्यक्तिगत करदाताओं को बजट से उम्मीदें हैं। खासतौर पर स्टैंडर्ड डिडक्शन में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है, जिससे मध्यम वर्ग को अतिरिक्त राहत मिल सकती है।
नए आयकर कानून को लेकर उद्योगों की उम्मीद
उद्योग जगत की नजरें नए और सरल आयकर अधिनियम 2025 पर टिकी हैं, जो एक अप्रैल से लागू होना है। बजट में इसके नियमों और दिशा-निर्देशों को स्पष्ट किए जाने की उम्मीद है। नई कर व्यवस्था को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए कुछ अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं, ताकि अधिक करदाता पुरानी प्रणाली छोड़कर नई व्यवस्था को अपनाएं। इसके साथ ही टीडीएस की अलग-अलग श्रेणियों और दरों को कम कर उन्हें सरल बनाए जाने की भी संभावना है।
सीमा शुल्क सुधार और विवाद समाधान
सीमा शुल्क सुधारों के तहत दरों में कटौती और प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर जोर दिया जा सकता है। इसके अलावा लंबे समय से विवादों में फंसी लगभग 1.53 लाख करोड़ रुपये की राशि के समाधान के लिए एक माफी या सेटलमेंट योजना लाई जा सकती है। इससे सरकार और उद्योग दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है।
रक्षा, ग्रामीण विकास और रोजगार पर जोर
वैश्विक तनाव को देखते हुए रक्षा क्षेत्र के लिए बजट आवंटन बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आजीविका बढ़ाने के उद्देश्य से ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन’ के तहत केंद्र और राज्यों की साझेदारी वाली नई योजना के लिए बजट में प्रावधान किया जा सकता है।
8वें वेतन आयोग और राज्यों को राहत
सरकारी कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग की घोषणा की भी उम्मीद जताई जा रही है, जिसे एक जनवरी 2026 से लागू किया जा सकता है। वहीं राज्यों को मिलने वाले करों के हिस्से में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार बढ़ोतरी संभव है, जिससे राज्यों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।
एमएसएमई और प्रमुख उद्योगों को समर्थन
एमएसएमई सेक्टर के साथ-साथ रत्न-आभूषण और चमड़ा उद्योगों के लिए विशेष रियायतें दिए जाने की संभावना है। इसके अलावा भविष्य की जरूरतों को देखते हुए लिथियम और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के खनन और प्रसंस्करण के लिए भी बजट में अलग से फंड का प्रावधान किया जा सकता है।
बजट से जुड़ी बड़ी उम्मीदें
कुल मिलाकर, इस बार का बजट आर्थिक सुधारों, कर सरलीकरण, रोजगार सृजन और दीर्घकालिक विकास की दिशा में अहम साबित हो सकता है। सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह संतुलित फैसलों के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ आम जनता और उद्योग जगत दोनों को राहत प्रदान करेगी।