मध्य प्रदेश कांग्रेस की दिल्ली में बड़ी बैठक, जीतू पटवारी और उमंग सिंघार ने आलाकमान के साथ बनाई उपचुनाव और संगठन की नई रणनीति

मध्य प्रदेश कांग्रेस में सांगठनिक बदलाव और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को लेकर दिल्ली में हलचल तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी जितेंद्र सिंह के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य एजेंडा प्रदेश कार्यकारिणी का पुनर्गठन और राज्य की दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों के लिए ठोस रणनीति तैयार करना रहा। सूत्रों के अनुसार, पिछले काफी समय से लंबित प्रदेश पदाधिकारियों की सूची पर इस दौरान विस्तार से चर्चा की गई है।

संगठन विस्तार और नई कार्यकारिणी पर मंथन

लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 29 सीटों पर मिली हार के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस में बड़े बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। दिल्ली में हुई इस बैठक में जीतू पटवारी ने संगठन की नई टीम के लिए संभावित नामों का पैनल साझा किया। पार्टी नेतृत्व का जोर इस बार ऐसी टीम बनाने पर है जो न केवल सक्रिय हो, बल्कि जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को भी साध सके। चर्चा है कि नई कार्यकारिणी में युवाओं को अधिक अवसर दिए जाएंगे ताकि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ा जा सके। बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि निष्क्रिय पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

उपचुनाव के लिए ‘बूथ स्तर’ की तैयारी

मध्य प्रदेश की विजयपुर और बुधनी विधानसभा सीटों पर होने वाले आगामी उपचुनाव कांग्रेस के लिए अग्निपरीक्षा की तरह हैं। बैठक में इन दोनों सीटों पर उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया और चुनाव प्रचार के रोडमैप पर चर्चा हुई। जीतू पटवारी ने आलाकमान को ‘आपका बूथ, आपकी शान’ अभियान की प्रगति से अवगत कराया। इस अभियान के जरिए पार्टी हर मतदान केंद्र पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि उपचुनावों के नतीजे राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे, इसलिए पूरी ताकत झोंकना अनिवार्य है।

“हम मध्य प्रदेश में संगठन को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। दिल्ली में आलाकमान के साथ हुई चर्चा में आगामी उपचुनावों और संगठन की मजबूती के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।” — जीतू पटवारी, अध्यक्ष, मध्य प्रदेश कांग्रेस

पिछली हार से सबक और भविष्य की चुनौती

बैठक के दौरान पिछले लोकसभा चुनाव के परिणामों का भी संक्षिप्त विश्लेषण किया गया। राज्य में कांग्रेस का खाता न खुल पाना पार्टी के लिए एक बड़ा झटका था। इस पृष्ठभूमि में, केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश इकाई को एकजुट होकर काम करने की नसीहत दी है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे की दिल्ली में मौजूदगी यह दर्शाती है कि पार्टी अब सामूहिक नेतृत्व के मॉडल पर आगे बढ़ना चाहती है। संगठन में गुटबाजी को खत्म करना और सभी वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर लाना आलाकमान की प्राथमिकता में शामिल है।

सरकार को घेरने के लिए जन आंदोलन की योजना

संगठन विस्तार के साथ-साथ कांग्रेस अब मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है। बैठक में राज्य के ज्वलंत मुद्दों, जैसे कानून व्यवस्था, किसानों की समस्याएं और बेरोजगारी पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने की रूपरेखा तैयार की गई। पार्टी नेताओं का मानना है कि केवल सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने के बजाय सड़क पर उतरकर जनता की लड़ाई लड़नी होगी। आने वाले दिनों में प्रदेश के विभिन्न संभागों में बड़े सम्मेलनों और रैलियों का आयोजन किया जा सकता है, जिसका उद्देश्य सरकार की विफलताओं को उजागर करना होगा।