अब गाड़ी बेचने पर भी नहीं बदलेगा उसका नंबर, परिवहन विभाग के नए फैसले से वाहन मालिकों को मिली बड़ी राहत

मध्य प्रदेश सहित देशभर के वाहन मालिकों के लिए राहत भरी खबर है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने वाहन हस्तांतरण (Vehicle Transfer) की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब यदि आप अपनी कार या बाइक किसी दूसरे व्यक्ति को बेचते हैं, तो उस वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं बदला जाएगा। यह निर्णय पुराने वाहनों के बाजार में पारदर्शिता लाने और कागजी कार्रवाई को कम करने के लिए लिया गया है।

इंदौर जैसे बड़े शहरों में, जहां सेकंड हैंड वाहनों का कारोबार करोड़ों में है, वहां यह नियम गेम-चेंजर साबित होगा। पहले की व्यवस्था में, जब कोई वाहन एक जिले से दूसरे जिले में बेचा जाता था, तो अक्सर नए नंबर की आवश्यकता पड़ती थी। इस प्रक्रिया में न केवल समय बर्बाद होता था, बल्कि वाहन मालिकों को एनओसी (NOC) और पुन: पंजीकरण के लिए आरटीओ के चक्कर लगाने पड़ते थे।

‘वन व्हीकल, वन नंबर’ की ओर कदम

परिवहन विभाग के इस कदम को ‘वन व्हीकल, वन नंबर’ की नीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है। अब वाहन की पहचान उसके पहले रजिस्ट्रेशन नंबर से ही तय होगी। जब भी स्वामित्व का हस्तांतरण होगा, विभाग केवल अपने डिजिटल डेटाबेस में नए मालिक का नाम अपडेट करेगा। इससे वाहन की पूरी हिस्ट्री एक ही नंबर पर सुरक्षित रहेगी, जिससे धोखाधड़ी की गुंजाइश कम हो जाएगी।

“नियमों में सरलता लाने से न केवल आम जनता को सुविधा होगी, बल्कि विभाग के पास भी वाहनों का सटीक और स्थायी रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।” — विभागीय सूत्र

सेकंड हैंड कार बाजार पर सकारात्मक प्रभाव

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से पुराने वाहनों की रीसेल वैल्यू पर सकारात्मक असर पड़ेगा। अक्सर खरीदार दूसरे जिले के नंबर वाली गाड़ी लेने से कतराते थे क्योंकि उन्हें नंबर बदलवाने की फीस और कानूनी जटिलताओं का डर रहता था। अब नंबर स्थिर रहने से खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा। विशेष रूप से उन लोगों के लिए यह अच्छी खबर है जिन्होंने अपनी पसंद के ‘फैंसी’ या ‘लकी’ नंबर के लिए अतिरिक्त भुगतान किया है, क्योंकि वह नंबर अब वाहन की पहचान बना रहेगा।

सुरक्षा और ट्रैकिंग में आसानी

सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह बदलाव काफी अहम है। पुलिस और ट्रैफिक विभाग के लिए किसी भी वाहन का ट्रैक रिकॉर्ड निकालना अब और भी आसान होगा। चूंकि नंबर कभी नहीं बदलेगा, इसलिए वाहन से जुड़े किसी भी पुराने विवाद, चालान या दुर्घटना की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। पहले नंबर बदलने की स्थिति में रिकॉर्ड को ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो जाता था।

पुरानी व्यवस्था की चुनौतियां

पुरानी व्यवस्था में, एक राज्य से दूसरे राज्य या एक जिले से दूसरे जिले में वाहन ले जाने पर भारी टैक्स और लंबी कागजी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता था। हालांकि, केंद्र सरकार ने इससे पहले भारत सीरीज (BH Series) की शुरुआत की थी, लेकिन वह केवल कुछ विशिष्ट श्रेणियों के लिए थी। अब सामान्य रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों के लिए भी नियमों को लचीला बनाकर सरकार ने मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी है। इंदौर आरटीओ में अब इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं, जिससे दलालों की भूमिका भी सीमित होने की उम्मीद है।