इंदौर में गंदे पानी की सप्लाई पर सियासत तेज, यूथ कांग्रेस का नगर निगम के खिलाफ पैदल मार्च, आंदोलन की चेतावनी

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में दूषित जल आपूर्ति को लेकर जनता का गुस्सा अब सड़क पर उतरने लगा है। शहर के कई इलाकों में पिछले कई दिनों से नलों से गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायतें मिल रही हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर इंदौर यूथ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ बड़े पैमाने पर पैदल मार्च निकालने का निर्णय लिया है।

यूथ कांग्रेस के पदाधिकारियों का कहना है कि शहर के विभिन्न वार्डों में लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इसके चलते पीलिया, टाइफाइड और पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। कई घरों में तो पानी इतना गंदा आ रहा है कि वह कपड़े धोने के लायक भी नहीं है। प्रशासन को बार-बार अवगत कराने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

प्रशासनिक लापरवाही और जनता का आक्रोश

इंदौर नगर निगम स्वच्छता के मामले में देश में अव्वल आता है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं जैसे साफ पानी की आपूर्ति में विफलता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि निगम के अधिकारी केवल कागजों पर काम कर रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि पुरानी पाइपलाइनों के लीकेज की वजह से सीवरेज का पानी पीने के पानी में मिल रहा है।

इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित घनी आबादी वाले इलाके और निचली बस्तियां हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि उन्होंने कई बार जोनल ऑफिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां से केवल आश्वासन ही मिलता है। अब यूथ कांग्रेस इन सभी शिकायतों को लेकर नगर निगम मुख्यालय का घेराव करेगी।

पैदल मार्च और आंदोलन की रणनीति

आगामी विरोध प्रदर्शन को लेकर यूथ कांग्रेस ने विस्तृत योजना तैयार की है। इस पैदल मार्च में शहर भर से कार्यकर्ता और प्रभावित नागरिक शामिल होंगे। मार्च की शुरुआत शहर के प्रमुख चौराहों से होते हुए नगर निगम कार्यालय तक जाएगी। संगठन के नेताओं का कहना है कि यह केवल एक प्रदर्शन नहीं बल्कि सोए हुए प्रशासन को जगाने की कोशिश है।

कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जल आपूर्ति में सुधार नहीं किया गया और प्रभावित क्षेत्रों में नई पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और उग्र होगा। प्रदर्शन के दौरान नगर निगम आयुक्त को एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा, जिसमें समस्या के समाधान के लिए समय सीमा तय करने की मांग की जाएगी।

स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी दूषित पानी के सेवन को लेकर अलर्ट जारी किया है। डॉक्टरों का मानना है कि मानसून के बाद वैसे ही जलजनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है, ऐसे में गंदा पानी स्थिति को और भयावह बना सकता है। यूथ कांग्रेस ने मांग की है कि नगर निगम को उन इलाकों में तत्काल टैंकरों के माध्यम से साफ पानी पहुंचाना चाहिए जहां पाइपलाइन में समस्या है।

यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। विपक्ष इसे नगर निगम चुनाव और आगामी रणनीतियों से जोड़कर देख रहा है, जबकि सत्ता पक्ष और निगम अधिकारी तकनीकी खराबी का हवाला देकर जल्द सुधार की बात कह रहे हैं। हालांकि, आम जनता के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता फिलहाल साफ पानी की उपलब्धता है।

यूथ कांग्रेस के इस कदम ने शहर की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि इस विरोध प्रदर्शन के बाद नगर निगम प्रशासन कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और इंदौरवासियों को गंदे पानी की समस्या से कब तक निजात मिलती है।