New Delhi: भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आज व्यापार जगत की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक को पार कर लिया है। करीब दो दशक से चली आ रही बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर कर दिए है।

इस समझौते का सबसे बड़ा और सीधा असर भारत के लग्जरी कार बाजार पर पड़ने वाला है। सरकार ने यूरोप से आने वाली पूरी तरह निर्मित (CBU) कारों पर लगने वाली भारी-भरकम 110% की इंपोर्ट ड्यूटी को घटाकर 10% करने का ऐलान किया है।
क्या हैं डील की मुख्य शर्तें?
हालांकि यह कटौती आकर्षक है, लेकिन इसके साथ कुछ महत्वपूर्ण नियम भी जोड़े गए हैं:
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सालाना कोटा: सरकार ने रियायती दरों पर आयात की जाने वाली गाड़ियों के लिए 2.5 लाख यूनिट प्रति वर्ष की सीमा तय की है।
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लागू होने का समय: टैरिफ में यह कटौती धीरे-धीरे लागू की जाएगी और इसे 2027 तक पूरी तरह प्रभावी बनाने का लक्ष्य है।
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इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर रुख: घरेलू ऑटो दिग्गज जैसे टाटा मोटर्स और महिंद्रा को सुरक्षा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को शुरुआती 5 साल तक इस छूट से बाहर रखा गया है।
आम आदमी और लग्जरी सेगमेंट पर असर
वर्तमान में, यदि आप 40,000 डॉलर (करीब 33 लाख रुपये) से अधिक कीमत की कार विदेश से मंगाते हैं, तो उस पर 110% टैक्स देना होता है। इस कटौती के बाद, ऑडी, मर्सिडीज-बेंज और BMW जैसे ब्रांड्स के वे हाई-एंड मॉडल जो भारत में नहीं बनते, उनकी कीमतें काफी हद तक नीचे आ जाएंगी।
विशेष ध्यान दें: मर्सिडीज और BMW की कई पॉपुलर कारें पहले से ही भारत में असेंबल की जाती हैं, जिन पर ड्यूटी कम (15-16.5%) लगती है। इसलिए, उन चुनिंदा मॉडल्स की कीमतों में बहुत बड़ा बदलाव नहीं दिखेगा, लेकिन ‘मेड इन यूरोप’ प्रीमियम मॉडल्स अब आम ग्राहकों की पहुंच के करीब होंगे।
भारत: दुनिया का उभरता ऑटो हब
अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है। सालाना करीब 44 लाख कारों की बिक्री के बावजूद, यूरोपीय कंपनियों की हिस्सेदारी अभी 4% से भी कम है। ऊंचे टैक्स की दीवारें अब तक विदेशी कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती थीं। इस डील के बाद फॉक्सवैगन और अन्य यूरोपीय दिग्गजों के लिए भारतीय बाजार में विस्तार करना आसान हो जाएगा।
आर्थिक प्रभाव और व्यापार का नया लक्ष्य
भारत और यूरोपीय संघ के बीच आपसी व्यापार पहले ही 190 अरब डॉलर (15.80 लाख करोड़ रुपये) को पार कर चुका है। इस एग्रीमेंट के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि:
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निर्यात में वृद्धि: भारत के कपड़ा, कृषि और सेवा क्षेत्र को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी।
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रक्षा और रणनीति: दोनों पक्षों के बीच 2026-2030 के लिए एक रणनीतिक योजना और रक्षा समझौते पर भी सहमति बनी है।
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रोजगार के अवसर: ऑटो पार्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नए निवेश से रोजगार बढ़ने की उम्मीद है।