FTA से बदलेगी इन राज्यों की किस्मत, यूपी-तमिलनाडु समेत कई राज्यों को बड़ा लाभ

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच लंबे समय से बातचीत के बाद भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आखिरकार पूरा हो गया है। वैश्विक स्तर पर चल रही आर्थिक अनिश्चितताओं और अमेरिका की सख्त टैरिफ नीतियों के बीच इस डील को बेहद अहम माना जा रहा है। इसी वजह से इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” का नाम दिया जा रहा है।

इस समझौते के तहत भारत से यूरोपीय यूनियन को होने वाले निर्यात में करीब 64 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी का अनुमान है। इतना ही नहीं, इससे भारत के छोटे कारोबारियों, किसानों, कारीगरों, स्टार्टअप्स और प्रोफेशनल्स के लिए यूरोप के बड़े बाजारों के दरवाजे खुल जाएंगे।

9,425 टैरिफ लाइनों पर जीरो ड्यूटी, निर्यात को मिलेगा बूस्ट

एफटीए के तहत 9,425 टैरिफ लाइनों को खत्म करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका सीधा फायदा कपड़ा, रेडीमेड गारमेंट्स, चमड़ा, जेम्स-ज्वैलरी, हस्तशिल्प, चाय, मसाले और समुद्री उत्पाद जैसे श्रम-प्रधान सेक्टर्स को मिलेगा। इसके साथ ही इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और मेडिकल इक्विपमेंट जैसे हाई-टेक सेक्टर्स के लिए भी यूरोपीय बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी।

राज्यों के लिए ‘एक्सपोर्ट जैकपॉट’, छोटे राज्यों को भी बड़ा मौका

इस एफटीए की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका फायदा सिर्फ बड़े औद्योगिक राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे और मझोले राज्य भी एक्सपोर्ट हब के रूप में उभर सकते हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर तमिलनाडु तक, देश के एक दर्जन से ज्यादा राज्य इस डील से नई आर्थिक रफ्तार पकड़ सकते हैं।

महाराष्ट्र: मैन्युफैक्चरिंग और एमएसएमई को नई उड़ान

महाराष्ट्र में यूरोपीय यूनियन से आने वाले ऑर्डर्स में तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। लगभग 99.6% निर्यात पर टैरिफ शून्य हो जाने से इचलकरंजी के टेक्सटाइल हब, पुणे के इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा। मुंबई से जेम्स-ज्वैलरी और ठाणे–रायगढ़ से दवा निर्यात बढ़ने की उम्मीद है, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

गुजरात: टेक्सटाइल, केमिकल्स और इंजीनियरिंग को बढ़त

गुजरात का निर्यात आधारित औद्योगिक ढांचा इस एफटीए से मजबूत होगा। सूरत में कपड़ा और डायमंड इंडस्ट्री को रफ्तार मिलेगी, जबकि भरूच और वडोदरा के केमिकल्स एक्सपोर्ट पर 12.8% से घटकर शून्य टैरिफ होने से बड़ा फायदा होगा।
राजकोट के इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स और वेरावल के समुद्री उत्पादों की यूरोप में मांग बढ़ने की संभावना है।

तमिलनाडु: कपड़ा और चमड़ा उद्योग के लिए सुनहरा मौका

तमिलनाडु के श्रम-प्रधान उद्योग पहले से ही वैश्विक स्तर पर मजबूत हैं। तिरुप्पुर के गारमेंट्स पर ड्यूटी खत्म होने से निर्यात और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ेंगी।
वेल्लोर–अंबूर बेल्ट में चमड़ा और जूते उद्योग को 17% से जीरो ड्यूटी का सीधा फायदा मिलेगा, वहीं चेन्नई और कोयंबटूर के इंजीनियरिंग व इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर भी मजबूत होंगे।

पश्चिम बंगाल: चाय, समुद्री उत्पाद और हस्तशिल्प को बढ़ावा

पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग चाय को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी। दीघा और हल्दिया से झींगा और फ्रोजन फिश जैसे समुद्री उत्पादों पर लगने वाला 26% तक का शुल्क घटने से तटीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े छोटे कारीगरों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है।

असम: किसानों और कारीगरों के लिए यूरोप का प्रीमियम बाजार

असम के चाय उत्पादक, मसाला किसान और बांस उद्योग से जुड़े कारीगरों को इस डील से सीधा लाभ मिलेगा। डिब्रूगढ़–जोरहाट की चाय, ऊपरी असम के मसाले और बांस आधारित फर्नीचर को यूरोप में बेहतर कीमत और स्थिर बाजार मिल सकता है।

केरल: मसाले और समुद्री निर्यात को नई रफ्तार

केरल के किसानों और मछुआरों के लिए यह एफटीए बेहद अहम साबित हो सकता है। कोच्चि और अलाप्पुझा से झींगा और टूना निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।
इडुक्की और वायनाड की काली मिर्च और इलायची को भी यूरोपीय बाजारों में ज्यादा पहुंच मिलेगी।

कर्नाटक: हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

कर्नाटक का एडवांस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम इस एफटीए से मजबूत होगा। बेंगलुरु–तुमकुरु क्षेत्र से इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा निर्यात में तेजी आने की संभावना है। गारमेंट्स एक्सपोर्ट से रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: तटीय और हाई-वैल्यू सेक्टर्स को फायदा

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम और काकीनाडा में समुद्री निर्यात, प्रोसेसिंग और कोल्ड-चेन सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। वहीं तेलंगाना में हैदराबाद–वारंगल बेल्ट से वस्त्र, फार्मा और मेडिकल डिवाइसेज के निर्यात को नई मजबूती मिलेगी।

पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश: एमएसएमई और कारीगर होंगे मजबूत

पंजाब के लुधियाना टेक्सटाइल्स, जालंधर के स्पोर्ट्स गुड्स और मंडी गोबिंदगढ़ की लाइट इंजीनियरिंग यूनिट्स को फायदा मिलेगा। राजस्थान के जयपुर आभूषण, जोधपुर फर्नीचर और यूपी के कानपुर–आगरा चमड़ा उद्योग, सहारनपुर हस्तशिल्प और नोएडा इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए यह डील नए अवसरों का दरवाजा खोल सकती है।