मध्य प्रदेश सरकार बाघ-मानव संघर्ष को रोकने के लिए बड़ी योजना पर काम कर रही है। इस पहल पर 390 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। राज्य में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है जिससे मानव बस्तियों के पास उनकी आवाजाही बढ़ी है।
प्रदेश के वन विभाग ने इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए व्यापक रणनीति तैयार की है। योजना के तहत बाघ आरक्षित क्षेत्रों के आसपास सुरक्षा उपाय मजबूत किए जाएंगे। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
संघर्ष के मुख्य कारण
बाघों के प्राकृतिक आवास में कमी आने से वे मानव बस्तियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। शिकार की तलाश में बाघ गांवों के नजदीक आ जाते हैं। पशुधन पर हमले की घटनाएं ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।
वन विभाग के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में बाघ-मानव संघर्ष की घटनाओं में इजाफा हुआ है। कई क्षेत्रों में बाघों ने पालतू जानवरों पर हमले किए हैं। कुछ मामलों में मानव जीवन को भी खतरा पैदा हुआ है।
योजना के मुख्य बिंदु
390 करोड़ रुपये की इस योजना में कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं। बाघ गलियारों का निर्माण किया जाएगा ताकि वन्यजीव सुरक्षित रास्ते से आवागमन कर सकें। संरक्षित क्षेत्रों के चारों ओर बाड़ लगाई जाएगी।
ग्रामीण इलाकों में निगरानी व्यवस्था को आधुनिक बनाया जाएगा। कैमरे और सेंसर लगाए जाएंगे जो बाघों की गतिविधि पर नजर रखेंगे। स्थानीय लोगों को तुरंत सूचना मिल सके इसके लिए अलर्ट सिस्टम विकसित किया जाएगा।
स्थानीय समुदाय की भागीदारी
वन विभाग ग्रामीणों को बाघों से बचाव के तरीके सिखाने के लिए जागरूकता अभियान चलाएगा। ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। समुदाय आधारित संरक्षण मॉडल को बढ़ावा मिलेगा।
पशुधन की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। बाघ हमले से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। स्थानीय लोगों की आजीविका को नुकसान न हो इसका भी ध्यान रखा जाएगा।
संरक्षण और सुरक्षा का संतुलन
मध्य प्रदेश बाघों की आबादी के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। वन्यजीव संरक्षण के साथ मानव सुरक्षा भी जरूरी है। सरकार दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना दीर्घकालिक समाधान प्रदान कर सकती है। वैज्ञानिक तरीकों से बाघों के आवास का विस्तार किया जाएगा। इससे वन्यजीवों को पर्याप्त जगह मिलेगी और मानव बस्तियों पर दबाव कम होगा।
राज्य सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने का निर्णय लिया है। अगले कुछ महीनों में काम शुरू हो जाएगा। वन विभाग के अधिकारी विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वय कर रहे हैं।