प्रसिद्ध गायक और पद्मश्री कैलाश खेर ने भोपाल में दैनिक भास्कर से खास बातचीत में देश की बदलती तस्वीर पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए बदलावों की सराहना करते हुए कहा कि भारत अब सिर्फ बात नहीं करता, बल्कि करके दिखाता है।
कैलाश खेर ने कहा कि मध्यप्रदेश और भारत की हर वह धरती उन्हें प्रिय है जहां अध्यात्म, कला और मनुष्यता साथ चलती हो। चंबल जैसे इलाकों में भी पुराने मंदिर मिलते हैं, जो बताता है कि बुरे कहे जाने वाले स्थानों में भी अच्छाई छुपी होती है।
PM मोदी ने दी नई दिशा
प्रधानमंत्री मोदी का जिक्र करते हुए कैलाश खेर ने कहा कि बदलाव का श्रेय किसी एक को नहीं दिया जा सकता। लेकिन कोई न कोई तो समाज को जगाता है। प्रधानमंत्री जब आए तो वो लकीर के फकीर नहीं थे, उन्होंने लक्ष्य रखा।
उन्होंने कहा कि पहले के प्रधानमंत्री भी अपने हिसाब से काम करते रहे होंगे। लेकिन अब एक स्पष्ट दिशा दिखाई देती है। योग, स्वच्छता और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी विषयों से शुरुआत हुई और वहीं से बदलाव की नींव पड़ी।
रेलवे स्टेशन से लेकर अंतरिक्ष तक
कैलाश खेर ने कहा कि आज रेलवे स्टेशन सुधर रहे हैं, सफाई हो रही है, इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। दुनिया आज भारत को खेल, विज्ञान और अंतरिक्ष हर क्षेत्र में मान रही है। इसरो ने नासा को पछाड़ दिया, यह कोई छोटी बात नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह उस नेतृत्व का परिणाम है जो देश को जगाता है और दिशा देता है। जागा हुआ व्यक्ति ही दूसरों को जगा सकता है।
गुलामी की मानसिकता से मुक्ति
कैलाश खेर ने साफ शब्दों में कहा कि भारत में लंबे समय तक गुलामी की मानसिकता रही। गुलाम आदमी दगा देता है और हमारे देश में दगाबाजों की बाढ़ रही है। जो पहले दो कौड़ी के थे, चापलूसी करके अमीर हो गए।
उन्होंने कहा कि अब धीरे-धीरे बेईमानों से पर्दा उठ रहा है। चरित्रवान लोगों को आगे लाया जा रहा है। भारत पहले बहाने बनाकर जीता था, लेकिन अब भीतर से चरित्र का निर्माण हो रहा है।
करप्शन कम हो रहा, तमीज बन रही
गायक ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सब एकदम पवित्र हो गए हैं। करप्शन है, बेईमानी है, लेकिन अब वो कम हो रहा है। सड़कें अच्छी हो रही हैं, लोग कूड़ा सड़कों पर नहीं फेंक रहे, ट्रैफिक सेंस आ रहा है।
उन्होंने कहा कि जैसे रोड, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट बन रहे हैं, वैसे ही समाज की तमीज भी बन रही है। पहले मनुष्य गुरूर और घमंड में था, अब होश में आ रहा है। को-एक्जिस्टिंग की पद्धति पर जीना सीख रहा है।
दुनिया भारत के गुण गा रही
कैलाश खेर ने कहा कि पिछले दस-ग्यारह वर्षों में इतना बदलाव आया है कि आज पूरी दुनिया भारत के गुण गा रही है। विश्व वंदे मातरम गा रहा है। दूसरी भाषा, दूसरी वेशभूषा, दूसरी त्वचा के लोग भारत को नमस्कार कह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में बनने वाले प्रोडक्ट्स में अभी और ईमानदारी आने की जरूरत है। विश्व गुरु बनने की बात तब सार्थक होगी जब चरित्र भी बने।
पद्म अवॉर्ड अब गुमनाम नायकों को
कैलाश खेर ने पद्म अवॉर्ड की बदलती सोच की भी तारीफ की। आज पद्म अवॉर्ड ऐसे लोगों को मिल रहा है जिनका नाम किसी ने सुना भी नहीं था। कोई पर्यावरण के लिए जीवन खपा गया, कोई चाइल्ड ट्रैफिकिंग के खिलाफ लड़ा।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से मिलकर आंखें नम हो जाती हैं। यही चरित्र जागरण है भारत का। भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र मिला, यह नए भारत के नौनिहाल हैं।
तेरी दीवानी साधना है, मनोरंजन नहीं
अपने मशहूर गीत तेरी दीवानी पर कैलाश खेर ने कहा कि यह मनोरंजन का गीत नहीं है। अगर संत भी गाने लगें, सत्संग हो जाए, संकीर्तन हो जाए, तो समझिए वो गाना मनोरंजन का नहीं है।
उन्होंने फिल्मी संगीत से इतर नॉन-फिल्म और लोक संगीत पर जोर दिया। फिल्में नई हैं, भारत हजारों साल पुराना है। जब फिल्में नहीं थीं, तब भी इल्म था।
सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी
सोशल मीडिया पर सिंगर्स की बाढ़ के सवाल पर कैलाश खेर ने साफ कहा कि जो आप देख रहे हैं, वो मैं नहीं देख रहा। मैं आज भी शास्त्रीय और लोक संगीत सुनता हूं।
उनके मुताबिक भारत आज भी स्वर्ण युग में जी रहा है। हमारी धरती ने इतना ज्ञान दिया है कि हजारों साल का रिसर्च मटेरियल मौजूद है, बस हम खुद देखना शुरू करें।