अजित पवार के निधन के बाद NCP में उठे सवाल: क्या सुनेत्रा पवार को मिल सकता है डिप्टी CM का पद?

Mumbai News : अजित पवार की अचानक मृत्यु ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी का उनका गुट अब अनिश्चित भविष्य की ओर देख रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, धनंजय मुंडे और छगन भुजबल सुनेत्रा पवार से मिलने पहुंचे हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रफुल्ल पटेल एनसीपी के अध्यक्ष बन सकते हैं। सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम का पद दिया जा सकता है और वे अजित पवार की सीट बारामती से चुनाव लड़ सकती हैं।

दोनों गुटों के विलय की संभावना

एनसीपी के दोनों धड़ों के बीच विलय की चर्चा तेज हो गई है। अजित पवार पहले से ही इस दिशा में प्रयास कर रहे थे। ऐसे में सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम और सुप्रिया सुले को केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है।

जुलाई 2023 में अजित पवार ने 40 विधायकों और कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ शरद पवार से अलग होकर नई राह पकड़ी थी। पार्टी पूरी तरह उनके व्यक्तित्व के इर्द-गिर्द बनी थी। अब सवाल है कि क्या यह गुट उनके बिना टिक पाएगा।

नेतृत्व को लेकर बड़ा सवाल

अगर पार्टी अलग रहती है तो नेतृत्व का सवाल सबसे बड़ा है। सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल सभी बड़े नेता हैं, लेकिन विश्लेषकों को आपसी खींचतान की आशंका है।

विधानसभा और नगर परिषद चुनावों के बाद अजित पवार गुट मजबूत हुआ था। शरद पवार की एनसीपी कमजोर हो गई थी। नगर निगम चुनावों में दोनों गुटों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था।

जब अजित पवार से दोनों गुटों के एक होने के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने इस संभावना से इनकार नहीं किया था। आगामी जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में दोनों गुटों ने घड़ी के चुनाव चिह्न पर साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया था।

विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विश्लेषक हेमंत देसाई ने कहा कि ऐसा लग रहा था कि दोनों गुटों को साथ लाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे थे। अब सवाल है कि पार्टी की जिम्मेदारी कौन संभालेगा। दोनों गुटों को विलय करना होगा और परिवार से ही किसी को नेतृत्व करना होगा।

लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे नेता वहां जाएंगे, जहां उन्हें सबसे ज्यादा राजनीतिक फायदा दिखेगा। जरूरी नहीं कि वे शरद पवार गुट में ही जाएं।

देसाई ने आगे कहा कि सुनील तटकरे, धनंजय मुंडे या प्रफुल्ल पटेल जैसे नेता बीजेपी के साथ जाना ज्यादा पसंद करेंगे।

बारामती में उपचुनाव अनिवार्य

अजित पवार के निधन से बारामती में उपचुनाव कराना जरूरी हो जाएगा। 2024 में अजित पवार ने एनसीपी (एसपी) के उम्मीदवार और अपने भतीजे युगेंद्र पवार को हराया था।

देसाई ने कहा कि अब सवाल है कि बारामती और पुणे, पिंपरी-चिंचवड का नेतृत्व कौन करेगा। चूंकि पार्टी मुख्य रूप से पश्चिमी महाराष्ट्र में केंद्रित रही है, इसलिए नया नेता भी पश्चिमी महाराष्ट्र से ही होना चाहिए।

परिवार में संभावित उत्तराधिकारी

अगर दोनों गुटों का विलय नहीं होता है तो परिवार के भीतर से अगला नेता पत्नी सुनेत्रा पवार या बेटे जय या पार्थ हो सकते हैं। लेकिन जय और पार्थ पवार राजनीति में अपेक्षाकृत अनुभवहीन हैं।

सुनेत्रा पवार ने राजनीति में तब कदम रखा था, जब अजित पवार ने बारामती लोकसभा सीट पर सुप्रिया सुले के खिलाफ उनका नाम घोषित किया था। वे चुनाव हार गईं, लेकिन बाद में राज्यसभा सदस्य बनीं।

कई वर्षों तक पर्दे के पीछे रहते हुए सुनेत्रा बारामती में महिला समूहों और कल्याणकारी कार्यक्रमों के जरिए सामाजिक कामों में सक्रिय रही हैं।

महायुति में बने रहने का सवाल

अजित पवार की एनसीपी को यह भी तय करना होगा कि वह महायुति में बनी रहे या विपक्ष में जाए। अगर पार्टी महायुति छोड़ती है तो देसाई का मानना है कि एनसीपी के कांग्रेस में जाने की संभावना कम है।

लेकिन राजनीतिक विश्लेषक प्रकाश बाल इससे सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अंत में एनसीपी को कांग्रेस में विलय करना ही पड़ेगा। इससे कांग्रेस को खुद को फिर से मजबूत करने का मौका मिल सकता है।

प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे नेताओं को भी अब कठिन फैसले लेने होंगे। पटेल कभी महाराष्ट्र में जनाधार वाले नेता नहीं रहे हैं। तटकरे और उनका परिवार रायगढ़ जिले तक सीमित हैं।

धनंजय मुंडे की बीड जिले में क्षेत्रीय पकड़ रही है, लेकिन सरपंच संतोष देशमुख की हत्या में उनके सहयोगी का नाम आने के बाद उनका प्रभाव कमजोर पड़ा है। इसलिए इन नेताओं के लिए बीजेपी जैसी बड़ी पार्टी में जाना एक व्यवहारिक विकल्प माना जा रहा है।