‘पिता PWD मंत्री और ठेकेदार दिला रहा कपड़े…’ कैलाश विजयवर्गीय के नए बयान से मंचा हड़कंप

Indore News : मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने सीधे व्यवस्था की जड़ों और पारिवारिक नैतिकता पर चोट की है। एक निजी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में छात्रों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार और परवरिश के अंतर्संबंधों पर ऐसी टिप्पणी की, जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
“ठेकेदार के भरोसे परवरिश तो कैसा चरित्र?”
विजयवर्गीय ने भ्रष्टाचार के प्रभाव को घर के माहौल से जोड़ते हुए कहा, “अगर पिताजी PWD मिनिस्टर हैं और बेटे को कपड़े दिलाने ठेकेदार जा रहा है, तो वहां चरित्र की बात करना बेमानी है।” उन्होंने तर्क दिया कि जब बच्चों की सुख-सुविधाओं का स्रोत अनैतिक होगा, तो उनसे राष्ट्रभक्ति या उच्च नैतिक मूल्यों की उम्मीद करना व्यर्थ है।
माता-पिता के लिए भी हो ‘सिलेबस
मंत्री ने शिक्षा व्यवस्था से ज्यादा घर के वातावरण को बच्चे के विकास के लिए जिम्मेदार ठहराया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:
  • समय का गणित: बच्चा स्कूल में सिर्फ 4 घंटे रहता है, जबकि 20 घंटे घर पर। असली सीख घर से ही मिलती है।
  • पेरेंट्स का व्यवहार: यदि माता-पिता घर में पार्टियों और अनैतिक गतिविधियों में लिप्त रहेंगे, तो बच्चा वही संस्कार ग्रहण करेगा।
  • नया प्रस्ताव: उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों के लिए भी एक ‘सिलेबस’ होना चाहिए, जो उन्हें घर में सही आचरण सिखा सके।
शिक्षा नीति बनाम नैतिक वातावरण
विजयवर्गीय ने वर्तमान शिक्षा पद्धति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज समाज में डॉक्टर और इंजीनियर बनाने की होड़ तो है, लेकिन ‘चरित्रवान नागरिक’ बनाने की चिंता किसी को नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार चाहे कितनी भी बेहतर शिक्षा नीति (Education Policy) लागू कर ले, यदि घर के भीतर का वातावरण अनैतिक है, तो चरित्र निर्माण संभव नहीं है।
बयानों से पुराना नाता
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में इंदौर के दूषित जल कांड पर अपनी टिप्पणी को लेकर वे विवादों में रहे थे। पारिवारिक शोक के बाद काम पर लौटते ही उनके इस ‘PWD मंत्री’ वाले उदाहरण ने विपक्ष को भी सक्रिय कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीधे तौर पर विभाग का नाम लेकर दिया गया यह उदाहरण सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की कार्यप्रणाली पर एक आंतरिक कटाक्ष है।