सांसद शंकर लालवानी की अध्यक्षता में जिला विकास और निगरानी समिति (दिशा) की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्थाओं और अमृत योजना के तहत चल रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और दीर्घकालिक बनाना रहा।
ड्रेनेज और पेयजल लाइनों की जीआईएस मैपिंग पर जोर
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इंदौर शहर में ड्रेनेज और पेयजल लाइनों की सुदृढ़ मॉनीटरिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके तहत नई और पुरानी दोनों तरह की ड्रेनेज तथा जल आपूर्ति लाइनों की जीआईएस मैपिंग की जाएगी। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ड्रेनेज और पेयजल लाइनें आपस में न मिलें और न ही पास-पास समानांतर रूप से बिछी हों, ताकि भविष्य में दूषित पानी की समस्या उत्पन्न न हो।
शहरी और ग्रामीण योजनाओं की प्रगति पर चर्चा
बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, जिला पंचायत अध्यक्ष रीना सतीश मालवीय, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, विधायक रमेश मेंदोला और मधु वर्मा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नवजीवन विजय पंवार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
शहरी क्षेत्रों में अमृत योजना पैकेज-1 और अमृत योजना 2.0 के तहत चल रहे कार्यों की प्रगति पर चर्चा हुई। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन और उसकी प्रभावशीलता की समीक्षा की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अमृत योजना के अंतर्गत शुभारंभ के बाद किए जा रहे कार्यों की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।
पुरानी लाइनों की मैपिंग को बताया गया जरूरी
सांसद शंकर लालवानी ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि अमृत योजना 2.0 के तहत डाली जा रही नई जल और ड्रेनेज लाइनों की जीआईएस मैपिंग अनिवार्य हो। उन्होंने कहा कि केवल नई लाइनों की मैपिंग पर्याप्त नहीं है, बल्कि पुरानी जल और ड्रेनेज लाइनों की भी मैपिंग कर उन्हें नई लाइनों के साथ सुपर इम्पोज किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में लाइन टूटने या आपसी टकराव जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
जल गुणवत्ता की नियमित जांच पर बल
बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। बताया गया कि हैंडपंप और बोरिंग के पानी की नियमित जांच आवश्यक है। इसी तरह शहरी क्षेत्रों में भी विभिन्न इलाकों से रैंडम आधार पर जल सैंपल लिए जाने चाहिए, जिससे पानी की वास्तविक गुणवत्ता का सही आकलन हो सके।
निर्धारित समय और गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि ड्रेनेज और पेयजल से जुड़े सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। जहां खुदाई की जाती है, वहां कार्य समाप्त होते ही तुरंत गड्ढे भरने और सड़क सुधार का काम किया जाए। उन्होंने वैध कॉलोनियों में स्थापित एसटीपी कार्यों के निरीक्षण और उनके सुचारू संचालन पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही।
ग्रीष्मकाल को देखते हुए वैकल्पिक जल व्यवस्था की तैयारी
बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी कार्य किए गए हैं। साथ ही निर्देश दिए गए कि ग्रीष्मकाल को ध्यान में रखते हुए जल जीवन मिशन की टंकियों के जल स्रोतों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी की जाए। जिले के सभी गांवों तक पेयजल की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नर्मदा जल पहुंचाने की कार्ययोजना तैयार करने पर भी सहमति बनी।
जल संकट से राहत दिलाना मुख्य उद्देश्य
आगामी गर्मी के मौसम को देखते हुए शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए तत्काल कार्ययोजना बनाकर उस पर अमल शुरू करने के निर्देश दिए गए। बैठक में जनप्रतिनिधियों ने अपने सुझाव और समस्याएं भी रखीं, जिन पर जिला प्रशासन और नगर निगम ने गंभीरता से संज्ञान लिया। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि इन सभी प्रयासों का मूल उद्देश्य गर्मी के मौसम में जनता को किसी भी प्रकार की जल समस्या से राहत दिलाना है।