रेलवे में 20 साल पुरानी परंपरा समाप्त, रिटायरमेंट पर अब नहीं मिलेगा चांदी का सिक्का

भारतीय रेलवे ने एक लंबे समय से चली आ रही परंपरा को समाप्त करने का फैसला किया है। अब सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को चांदी का सिक्का नहीं दिया जाएगा। यह प्रथा पिछले 20 वर्षों से जारी थी।

रेलवे प्रशासन ने इस परंपरा को खत्म करने का निर्णय वित्तीय कारणों से लिया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बढ़ते खर्च और बजटीय दबाव के चलते यह कदम उठाया गया है।

कर्मचारियों में निराशा

लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के लिए यह सिक्का सम्मान का प्रतीक था। कई कर्मचारियों ने इस फैसले पर निराशा जताई है। उनका मानना है कि यह उनकी सेवा के प्रति सम्मान का प्रतीक था।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अब सेवानिवृत्ति समारोह में केवल प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न दिए जाएंगे। चांदी के सिक्के की जगह अन्य प्रतीकात्मक उपहार दिए जा सकते हैं।

प्रशासनिक सुधार का हिस्सा

रेलवे प्रशासन ने इसे आधुनिकीकरण और सुधार प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। विभाग का कहना है कि संसाधनों का बेहतर उपयोग करना जरूरी है। यह निर्णय देशभर के सभी रेलवे जोन में लागू होगा।

अधिकारियों ने बताया कि हर साल हजारों कर्मचारी रिटायर होते हैं। इन सभी को चांदी का सिक्का देने में काफी राशि खर्च होती थी। नई व्यवस्था से इस खर्च में कमी आएगी।

पुरानी परंपरा का अंत

यह परंपरा वर्ष 2004 के आसपास शुरू की गई थी। तब से लेकर अब तक हजारों कर्मचारियों को यह सम्मान मिला। कई सेवानिवृत्त कर्मचारी इस सिक्के को गर्व से संभालकर रखते थे।

रेलवे यूनियनों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित करेगा। कुछ संगठनों ने इस निर्णय की समीक्षा की मांग भी की है।

हालांकि, रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला अंतिम है। आने वाले समय में कोई बदलाव की संभावना नहीं है। विभाग का फोकस अब अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर होगा।