इंदौर में यशवंत सागर और सिरपुर तालाब के प्रदूषित जल से पेयजल आपूर्ति पर संकट

इंदौर शहर में पेयजल आपूर्ति के प्रमुख स्रोत यशवंत सागर और सिरपुर तालाब का पानी प्रदूषित पाया गया है। इससे शहरवासियों को सुरक्षित पेयजल मुहैया कराने को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।

यशवंत सागर से प्राप्त जल को देवधर्म टेकरी स्थित ट्रीटमेंट प्लांट में लाया जाता है। यहां क्लोरीनेशन प्रक्रिया के माध्यम से पानी का शुद्धिकरण किया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद साफ किए गए जल को विभिन्न वितरण केंद्रों तक पहुंचाया जाता है।

जल वितरण प्रणाली

ट्रीटमेंट प्लांट से शुद्ध किया गया पानी चार प्रमुख भंडारण टंकियों को भेजा जाता है। इनमें बीएसएफ, संगम नगर, पल्हर नगर और किला मैदान स्थित जल टंकियां शामिल हैं। इन टंकियों से जुड़ी आवासीय कॉलोनियों में नियमित रूप से जल आपूर्ति की जाती है।

हालांकि मूल स्रोत पर ही पानी की गुणवत्ता खराब होने से ट्रीटमेंट प्लांट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। प्रदूषित जल के शुद्धिकरण में अधिक रसायनों और प्रयासों की जरूरत होती है।

प्रदूषण के कारण

यशवंत सागर और सिरपुर तालाब में प्रदूषण बढ़ने के कई कारण सामने आए हैं। आसपास की बस्तियों से गंदा पानी सीधे इन जल स्रोतों में मिल रहा है। औद्योगिक अपशिष्ट और घरेलू कचरे की निकासी भी इन तालाबों में हो रही है।

जल निकायों के आसपास अतिक्रमण और अवैध निर्माण से स्थिति और खराब हुई है। वर्षा जल के साथ प्रदूषक तत्व सीधे तालाबों में पहुंच रहे हैं।

स्वास्थ्य संबंधी खतरे

प्रदूषित जल स्रोतों से आपूर्ति होने वाले पेयजल में हानिकारक तत्वों की मौजूदगी संभव है। क्लोरीनेशन सभी प्रकार के प्रदूषकों को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए जल स्रोतों की सफाई जरूरी है। केवल ट्रीटमेंट पर निर्भरता सुरक्षित नहीं है।

प्रशासनिक कदम आवश्यक

नगर निगम और जल प्रदाय विभाग को तत्काल कार्रवाई करनी होगी। यशवंत सागर और सिरपुर तालाब के जलग्रहण क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त बनाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

अवैध नालों को बंद करना और सीवेज ट्रीटमेंट की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है। तालाबों के आसपास के अतिक्रमण हटाए जाने चाहिए। नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी भी आवश्यक है।

इंदौर के लाखों निवासियों के लिए स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण में देरी स्वास्थ्य आपातकाल को न्योता दे सकती है।